21 Dec 2025

'पूछते हैं कि क्या हुआ दिल को...' पढ़ें मुनीर नियाज़ी के दिल जीत लेने वाले शेर.

फ़िक्र है मिरी

कोई तो है 'मुनीर' जिसे फ़िक्र है मिरी, ये जान कर अजीब सी हैरत हुई मुझे.

शाम ढलते ही

आ गई याद शाम ढलते ही, बुझ गया दिल चराग़ जलते ही.

सादगी न गई

पूछते हैं कि क्या हुआ दिल को, हुस्न वालों की सादगी न गई.

ख़यालों में उम्र

कटी है जिस के ख़यालों में उम्र अपनी 'मुनीर', मज़ा तो जब है कि उस शोख़ को पता ही न हो.

तबीअत नहीं मिली

कुछ दिन के बा'द उस से जुदा हो गए 'मुनीर', उस बेवफ़ा से अपनी तबीअत नहीं मिली.

हिज्र में बीमार 

'मुनीर' अच्छा नहीं लगता ये तेरा, किसी के हिज्र में बीमार होना.