22 Dec 2025

'मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना...' पढ़ें अल्लामा इकबाल के मशहूर शेर.

तिरे इश्क़

तिरे इश्क़ की इंतिहा चाहता हूं, मिरी सादगी देख क्या चाहता हूं.

हिन्दोस्ताँ हमारा

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा.

फ़क़त निगाह 

फ़क़त निगाह से होता है फ़ैसला दिल का, न हो निगाह में शोख़ी तो दिलबरी क्या है.

ख़ुदा से नौमीदी

बुतों से तुझ को उमीदें ख़ुदा से नौमीदी, मुझे बता तो सही और काफ़िरी क्या है.

 तर्ज़-ए-हुकूमत 

 जम्हूरियत इक तर्ज़-ए-हुकूमत है कि जिस में, बंदों को गिना करते हैं तौला नहीं करते.

दिल-नवाज़

निगह बुलंद सुख़न दिल-नवाज़ जां पुर-सोज़, यही है रख़्त-ए-सफ़र मीर-ए-कारवाँ के लिए.