29 Dec 2025

'किसी हालत में भी तन्हा नहीं होने देती...' फ़रहत एहसास के वह शेर जिनको पढ़ने के बाद बोलने का दिल करें.

शाम से

1. वो चांद कह के गया था कि आज निकलेगा, तो इंतिज़ार में बैठा हुआ हूँ शाम से मैं.

हैरान दरिया

चांद भी हैरान दरिया भी परेशानी में है, अक्स किस का है कि इतनी रौशनी पानी में है.

रोना चाहता हूं

मैं रोना चाहता हूं ख़ूब रोना चाहता हूं मैं, फिर उस के बाद गहरी नींद सोना चाहता हूँ मैं.

मिरी तन्हाई

किसी हालत में भी तन्हा नहीं होने देती, है यही एक ख़राबी मिरी तन्हाई की.

आग़ोश में नहीं

वो अक़्ल-मंद कभी जोश में नहीं आता, गले तो लगता है आग़ोश में नहीं आता.

रोने की सदा

हर गली कूचे में रोने की सदा मेरी है, शहर में जो भी हुआ है वो ख़ता मेरी है.