30 Dec 2025

'पूछते हैं कि क्या हुआ दिल को...' पढ़ें मुनीर नियाज़ी के चुनिंदा शेर.

बहुत ग़म

कल मैं ने उस को देखा तो देखा नहीं गया, मुझ से बिछड़ के वो भी बहुत ग़म से चूर था.

हुस्न वालों

पूछते हैं कि क्या हुआ दिल को, हुस्न वालों की सादगी न गई.

ख़यालों में उम्र

कटी है जिस के ख़यालों में उम्र अपनी 'मुनीर', मज़ा तो जब है कि उस शोख़ को पता ही न हो.

तबीअत नहीं मिली

कुछ दिन के बा'द उस से जुदा हो गए 'मुनीर', उस बेवफ़ा से अपनी तबीअत नहीं मिली.

हिज्र में बीमार

'मुनीर' अच्छा नहीं लगता ये तेरा, किसी के हिज्र में बीमार होना.

गीत पुराने

किसी अकेली शाम की चुप में, गीत पुराने गा के देखो.