09 Jan 2026
गुलजार के वह शेर जिसको जवान से लेकर बूढ़ा अपनी बातों में कह जाता है.
शाख़ से लम्हे
हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते, वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते.
दास्ताँ हमारी
कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था, आज की दास्ताँ हमारी है.
शब उमडती
मैं चुप कराता हूं हर शब उमडती बारिश को, मगर ये रोज़ गई बात छेड़ देती है.
तुम्हारे ख़्वाब
तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं, सज़ाएँ भेज दो हम ने ख़ताएँ भेजी हैं.
आहट सुनता हूँ
दिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है, किस की आहट सुनता हूँ वीराने में.
सारी रात
एक ही ख़्वाब ने सारी रात जगाया है, मैं ने हर करवट सोने की कोशिश की.
उदास होता है
जब भी ये दिल उदास होता है, जाने कौन आस-पास होता है.
लौट के जाना
फिर वहीं लौट के जाना होगा, यार ने कैसी रिहाई दी है.
उम्र कम
वो उम्र कम कर रहा था मेरी, मैं साल अपने बढ़ा रहा था.