18 June 2026
'चाहिए उस का तसव्वुर ही से नक़्शा खींचना...' पढ़ें बहादुर शाह ज़फ़र के चुनिंदा शेर.
इश्क़ का बीमार
मर्ग ही सेहत है उस की मर्ग ही उस का इलाज, इश्क़ का बीमार क्या जाने दवा क्या चीज़ है.
नक़्शा खींचना
चाहिए उस का तसव्वुर ही से नक़्शा खींचना, देख कर तस्वीर को तस्वीर फिर खींची तो क्या.
सुर्ख़ लहू
मेरे सुर्ख़ लहू से चमकी कितने हाथों में मेहंदी, शहर में जिस दिन क़त्ल हुआ मैं ईद मनाई लोगों ने.
ताक़त कहूं
न मुझ को कहने की ताक़त कहूं तो क्या अहवाल, न उस को सुनने की फ़ुर्सत कहूं तो किस से कहूं.
दर्द-ए-मोहब्बत
न कोहकन है न मजनूँ कि थे मिरे हमदर्द, मैं अपना दर्द-ए-मोहब्बत कहूँ तो किस से कहूं.
शोख़ सितमगर
क्या पूछता है हम से तू ऐ शोख़ सितमगर, जो तू ने किए हम पे सितम कह नहीं सकते.
हमारी कि बोसा
क्या ताब क्या मजाल हमारी कि बोसा लें, लब को तुम्हारे लब से मिला कर कहे बग़ैर.
मुसीबत कहूँ
भरी है दिल में जो हसरत कहूँ तो किस से कहूं, सुने है कौन मुसीबत कहूँ तो किस से कहूं.
फ़रहाद ओ क़ैस
मैं सिसकता रह गया और मर गए फ़रहाद ओ क़ैस, क्या उन्ही दोनों के हिस्से में क़ज़ा थी मैं न था.