20 Jan 2026

'ये सोच के मां बाप की ख़िदमत में लगा हूं...' पढ़ें मुनव्वर राना के शानदार शेर.

आंखों का समुंदर 

एक आंसू भी हुकूमत के लिए ख़तरा है, तुम ने देखा नहीं आंखों का समुंदर होना.

 मिरी सैलाब

जब भी कश्ती मिरी सैलाब में आ जाती है, माँ दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है.

मां बाप की ख़िदमत

ये सोच के मां बाप की ख़िदमत में लगा हूं, इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा.

परदेस ने

बर्बाद कर दिया हमें परदेस ने मगर, माँ सब से कह रही है कि बेटा मज़े में है.

कमी थी

कुछ बिखरी हुई यादों के क़िस्से भी बहुत थे, कुछ उस ने भी बालों को खुला छोड़ दिया था.

मोहब्बत

तमाम जिस्म को आंखें बना के राह तको, तमाम खेल मोहब्बत में इंतिज़ार का है.

गांव में छप्पर

तुम्हारे शहर में मय्यत को सब कांधा नहीं देते, हमारे गांव में छप्पर भी सब मिल कर उठाते हैं.

थकन भूल गई

दिन भर की मशक़्क़त से बदन चूर है लेकिन, मां ने मुझे देखा तो थकन भूल गई है.