26 Jan 2026
'जान-ओ-दिल हैं उदास से मेरे...' पढ़ें मीर हसन के वह शेर जिन्होंने लोगों का मन मोह लिया.
तिरे पहलू
जो कोई आवे है नज़दीक ही बैठे है तिरे, हम कहां तक तिरे पहलू से सरकते जावें.
नख़वत से पाक
आसां न समझियो तुम नख़वत से पाक होना, इक उम्र खो के हम ने सीखा है ख़ाक होना.
आँख भर देखो
ग़ैर को तुम न आँख भर देखो, क्या ग़ज़ब करते हो इधर देखो.
जान-ओ-दिल
जान-ओ-दिल हैं उदास से मेरे, उठ गया कौन पास से मेरे.
पानी ही भरा
इतने आँसू तो न थे दीदा-ए-तर के आगे, अब तो पानी ही भरा रहता है घर के आगे.
इज़हार-ए-ख़मोशी
इज़हार-ए-ख़मोशी में है सौ तरह की फ़रियाद, ज़ाहिर का ये पर्दा है कि मैं कुछ नहीं कहता.
फेंका हमें
इक़िस्मत ने दूर ऐसा ही फेंका हमें कि हम, फिर जीते-जी पहुँच न सके अपने यार तक.
मैं हूं बुरा
गो भले सब हैं और मैं हूं बुरा, क्या भलों में बुरा नहीं होता.
वस्ल होता है
वस्ल होता है जिन को दुनिया में, यारब ऐसे भी लोग होते हैं.