10 Feb 2026
'आ देख कि मेरे आंसुओं में...' पढ़ें अदा जाफ़री के सदाबहार शेर.
नज़र न उठी
जिस की जानिब 'अदा' नज़र न उठी, हाल उस का भी मेरे हाल सा था.
मेरे आंसुओं
आ देख कि मेरे आंसुओं में, ये किस का जमाल आ गया है.
दिल की मंज़िल
हज़ार कोस निगाहों से दिल की मंज़िल तक, कोई क़रीब से देखे तो हम को पहचाने.
आगे न बढ़ो
दिल के वीराने में घूमे तो भटक जाओगे, रौनक़-ए-कूचा-ओ-बाज़ार से आगे न बढ़ो.
चेहरों के आइने
कुछ इतनी रौशनी में थे चेहरों के आइने, दिल उस को ढूँढता था जिसे जानता न था.
रस्म-ए-दुनिया
रीत भी अपनी रुत भी अपनी, दिल रस्म-ए-दुनिया क्या जाने.
बे-मेहर
लोग बे-मेहर न होते होंगे, वहम सा दिल को हुआ था शायद.
दिलों के सन्नाटे
बोलते हैं दिलों के सन्नाटे, शोर सा ये जो चार-सू है अभी.
इस मकाँ से
कोई ताइर इधर नहीं आता, कैसी तक़्सीर इस मकाँ से हुई.