07 March 2026

'अजब नशा है तिरे क़ुर्ब में कि जी चाहे...' पढ़ें ऐतबार साजिद के बेहतरीन शेर.

लम्हों की सबाहत 

फूल थे रंग थे लम्हों की सबाहत हम थे, ऐसे ज़िंदा थे कि जीने की अलामत हम थे.

आग़ोश में गुज़र

अजब नशा है तिरे क़ुर्ब में कि जी चाहे, ये ज़िंदगी तिरी आग़ोश में गुज़र जाए.

तअल्लुक़ तोड़ देना

ये बरसों का तअल्लुक़ तोड़ देना चाहते हैं हम, अब अपने आप को भी छोड़ देना चाहते हैं हम.

ख़्वाबों की जन्नत 

हम तिरे ख़्वाबों की जन्नत से निकल कर आ गए, देख तेरा क़स्र-ए-आली-शान ख़ाली कर दिया.

 दीवान ख़ाली 

डाइरी में सारे अच्छे शेर चुन कर लिख लिए, एक लड़की ने मिरा दीवान ख़ाली कर दिया.

झाँक मिरी ज़ाहिरी

मेरी पोशाक तो पहचान नहीं है मेरी, दिल में भी झाँक मिरी ज़ाहिरी हालत पे न जा.

रफ़्ता रफ़्ता

किसे पाने की ख़्वाहिश है कि 'साजिद', मैं रफ़्ता रफ़्ता ख़ुद को खो रहा हूं.

ग़म-ए-हालात

मुख़्तलिफ़ अपनी कहानी है ज़माने भर से, मुनफ़रिद हम ग़म-ए-हालात लिए फिरते हैं.

वबा की तवालत

इन दूरियों ने और बढ़ा दी हैं क़ुर्बतें, सब फ़ासले वबा की तवालत से मिट गए.