LPG Crisis Real Reason: देशभर में चल रहे LPG किल्लत के बारे में सरकार लोगों को आश्वासन दे रही है, लेकिन जनता की टेंशन बढ़ती ही जा रही है. इस लेख में आप जानेंगे कि गैस की परेशानी का असली कारण क्या है.
16 March, 2026
- दिल्ली से खुशबू सिंह की रिपोर्ट
कई दिन बीत जाने के बाद भी एलपीजी सिलेंडर को लेकर लोगों की परेशानी कम होती दिखाई नहीं दे रही है. गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही हैं और कई उपभोक्ताओं की बुकिंग भी समय पर नहीं हो पा रही है. सरकार का कहना है कि हमारे पास पर्याप्त मात्रा में गैस है और लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं, लेकिन एजेंसियों के बाहर लगी लंबी कतारें कुछ और ही हाल बयां कर रही हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर अचानक एलपीजी की किल्लत क्यों महसूस हो रही है और इसके पीछे क्या वजहें हैं.
ज्यादा बुकिंग के कारण स्टॉक खत्म
एलपीजी की मौजूदा किल्लत की सबसे बड़ी वजह अचानक बढ़ी मांग को माना जा रहा है. मिडिल ईस्ट वॉर की वजह से LPG सिलेंडर को लेकर अचानक बुकिंग में काफी बढ़ोतरी देखी गई थी. लोगों ने डर के कारण पहले से ही सिलेंडर बुक करना शुरू कर दिया था. गैस एजेंसियों के अनुसार पहले जहां रोज़ाना करीब 400 सिलेंडर की बुकिंग आती थी, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 600 से 700 तक पहुंच गई है. यानी सामान्य दिनों की तुलना में लगभग डेढ़ गुना तक ज्यादा बुकिंग आ रही है. अचानक बढ़ी इस मांग के कारण एजेंसियों के पास आने वाला स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है. कई उपभोक्ता यह सोचकर भी जल्दी-जल्दी बुकिंग कर रहे हैं कि आगे चलकर कहीं गैस की कमी न हो जाए. इस तरह की पैनिक बुकिंग से भी सप्लाई सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है और एजेंसियों को सिलेंडर की डिलीवरी मैनेज करने में दिक्कत आ रही है.

नियमों में बदलाव
एलपीजी बुकिंग के नियमों में हुए बदलाव भी इस समस्या की एक बड़ी वजह बनकर सामने आए हैं. अब घरेलू गैस सिलेंडर की दो बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिन का अंतर रखना जरूरी कर दिया गया है. सरकार का मकसद इससे जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग को रोकना है, ताकि कोई उपभोक्ता जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक न कर सके. लेकिन कई उपभोक्ताओं को इन नए नियमों की पूरी जानकारी नहीं है. ऐसे में जब उनकी बुकिंग सिस्टम में स्वीकार नहीं होती तो वे सीधे गैस एजेंसी पहुंच जाते हैं. इससे एजेंसियों के बाहर भीड़ बढ़ रही है और लोगों को लग रहा है कि गैस की किल्लत हो गई है, जबकि कई मामलों में यह नियमों से जुड़ी तकनीकी समस्या होती है.
e-KYC अनिवार्य
सरकार ने एलपीजी कनेक्शन के लिए e-KYC प्रक्रिया को भी अनिवार्य कर दिया है. इसका मकसद फर्जी कनेक्शन और गलत सब्सिडी दावों को रोकना है. हालांकि बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की e-KYC पूरी हो चुकी है, लेकिन जिन लोगों की जानकारी अपडेट नहीं है या जिनका आधार लिंक नहीं हुआ है, उन्हें बुकिंग में दिक्कत आ रही है. इसी वजह से कई उपभोक्ता सीधे गैस एजेंसी पहुंचकर e-KYC या अन्य औपचारिकताएं पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं. इससे एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें लग रही हैं और व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है.

ज्यादा बुकिंग से सर्वर डाउन
तकनीकी समस्याएं भी एलपीजी बुकिंग को प्रभावित कर रही हैं. अचानक बहुत ज्यादा बुकिंग आने से ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम और IVR कॉल सेंटर पर लोड बढ़ गया है. कई जगहों पर सर्वर धीमा पड़ गया है या कॉल कनेक्ट होने में समय लग रहा है. जब उपभोक्ताओं की बुकिंग फोन या ऑनलाइन नहीं हो पाती तो वे एजेंसियों पर जाकर बुकिंग कराने की कोशिश करते हैं. इससे एजेंसियों पर भीड़ बढ़ जाती है और ऐसा माहौल बन जाता है जैसे गैस की भारी कमी हो गई हो.
कुल मिलाकर एलपीजी की मौजूदा किल्लत कई कारणों का संयुक्त असर है- अचानक बढ़ी बुकिंग, नए नियमों की जानकारी का अभाव, e-KYC प्रक्रिया और तकनीकी दिक्कतें. एजेंसियों का कहना है कि सप्लाई सामान्य है और स्थिति को धीरे-धीरे संतुलित किया जा रहा है, लेकिन फिलहाल उपभोक्ताओं को थोड़ी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है.
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