10 May 2026
'मैं पा सका न कभी इस ख़लिश से छुटकारा...' पढ़ें जावेद अख्तर के दिल जीत लेने वाले शेर
ज़िंदाबाद हिन्दोस्तान
इसी जगह इसी दिन तो हुआ था ये एलान, अँधेरे हार गए ज़िंदाबाद हिन्दोस्तान.
ख़लिश से छुटकारा
मैं पा सका न कभी इस ख़लिश से छुटकारा, वो मुझ से जीत भी सकता था जाने क्यूं हारा.
दुनिया मिलती
अक़्ल ये कहती है दुनिया मिलती है बाज़ार में, दिल मगर ये कहता है कुछ और बेहतर देखिए
आँखों में भी काजल
उस की आँखों में भी काजल फैल रहा है, मैं भी मुड़ के जाते जाते देख रहा हूँ.
अल्फ़ाज़ में पिरोने
अगर पलक पे है मोती तो ये नहीं काफ़ी, हुनर भी चाहिए अल्फ़ाज़ में पिरोने का.
आस्तीं भिगोने
बहाना ढूँडते रहते हैं कोई रोने का, हमें ये शौक़ है क्या आस्तीं भिगोने का.
भूल जाऊं
मैं भूल जाऊं तुम्हें अब यही मुनासिब है. मगर भुलाना भी चाहूँ तो किस तरह भूलूं,
ये तस्वीर
इक मोहब्बत की ये तस्वीर है दो रंगों में, शौक़ सब मेरा है और सारी हया उस की है.
बे-ताबियाँ
पुर-सुकूँ लगती है कितनी झील के पानी पे बत, पैरों की बे-ताबियाँ पानी के अंदर देखिए.