09 July 2026
क्या आप जानते हैं बंगाल कि Kantha Embroidery कढ़ाई के बारे में? इसकी भी है अपनी एक कहानी.
ट्रेडिशनल कढ़ाई
फैशन की दुनिया में आजकल अपसाइक्लिंग और सस्टेनेबल फैशन ज्यादा ट्रेंड में है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसी ट्रेडिशनल कढ़ाई है, जिसने ये सोच सदियों पहले ही अपना ली थी?
कांथा एम्ब्रॉयडरी
हम बात कर रहे हैं कांथा एम्ब्रॉयडरी की, जो पश्चिम बंगाल की एक बहुत खूबसूरत और ऐतिहासिक हैंडीक्राफ्ट है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये सिर्फ कपड़ों को सजाती नहीं, बल्कि हर टांके के साथ एक कहानी भी बुनती है.
गांवों तक सीमित नहीं
आज कांथा एम्ब्रॉयडरी सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं है. ये डिजाइनर साड़ियों, जैकेट, कुर्तों, ड्रेसेस, बैग और यहां तक कि इंटरनेशनल फैशन रनवे तक अपनी खास पहचान बना चुकी है.
पश्चिम बंगाल
कांथा एम्ब्रॉयडरी की शुरुआत पश्चिम बंगाल के गांवों में हुई थी. उस टाइम महिलाएं पुराने सूती साड़ी और धोती की कई लेयर्स को एक साथ सिलकर रजाई यानी नक्शी कांथा तैयार करती थीं.
यादों और इमोशन्स
यादों और इमोशन्स से जुड़ा एक अनमोल हिस्सा होता था. मां अपनी बेटी को ये आर्ट सिखाती थी और दादी अपने एक्सपीरियंस से नए डिज़ाइन बनाना बताती थीं.
रनिंग स्टिच
कांथा एम्ब्रॉयडरी की सबसे बड़ी पहचान इसका रनिंग स्टिच यानी सीधी सिलाई वाला टांका है. देखने में ये बहुत ईजी लगता है, लेकिन इसे खूबसूरती से बनाने के लिए पेशेंस, एक्सपीरियंस और बारीक हुनर की जरूरत होती है.
समृद्धि का सिंबल
कांथा एम्ब्रॉयडरी को सिर्फ कढ़ाई कहना इसकी खूबसूरती को कम करना होगा. इसमें बने हर डिज़ाइन का अपना एक मतलब होता है. कहीं कमल समृद्धि का सिंबल होता है, तो कहीं मछली खुशहाली का मैसेज देती है.