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Explainer: Criminal Laws में क्या-क्या हुए बदलाव, जानिए इन कानूनों को लेकर क्यों हो रही है देश में चर्चा?

by Live Times
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Explainer: Criminal Laws में क्या क्या हुए बदलाव, जानिए इन कानूनों को लेकर क्यों हो रही है देश में चर्चा?

New Criminal Laws : एक जुलाई से भारत में नए आपराधिक कानून लागू हो गए हैं. इसी के साथ ब्रिटिश काल के आपराधिक कानून खत्म हो गए हैं. अब इन नए कानूनों की वजह से देश में राजनीतिक जंग छिड़ गई है.

02 July, 2024

New Criminal Laws : भारतीय न्याय संहिता (Bharatiya Nyaya Sanhita) ने 163 साल पुरानी भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) की जगह ले ली है. इसके अलावा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita) ने 126 साल पुरानी आपराधिक प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure) की जगह ले ली. वहीं, ‘भारतीय साक्ष्य अधिनियम’ ने 151 साल पुराने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ले ली है. आपको बता दें कि सरकार ने भारतीयों के लिए, इन कानूनों की वकालत करते हुए जल्द से जल्द न्याय देने का वादा किया है. दूसरी तरफ इन कानूनों की वजह से एक नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है.

अब नहीं बचेंगे भगोड़े अपराधी (Fugitive Criminal)

नए आपराधिक कानूनों में भगोड़े अपराधियों की गैरमौजूदगी में भी मुकदमा चलाने का प्रोविजन है. साथ ही जांच में टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल और इलेक्ट्रॉनिक समन को भी मान्यता दी गई है. नए कानूनों के तहत गिरफ्तार किए गए शख्स को अपने परिवार को जानकारी देने का अधिकार होगा. इसके अलावा इसमें कोर्ट की इजाजत के बिना जीरो FIR और फोरेंसिक जांच भी हो सकेगी. नए कानून के तहत रेप पीड़िता का बयान महिला पुलिसकर्मी और परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में दर्ज होगा.

मैरिटल रेप (Marital Rape) के कानून में हुआ संसोधन

नए कानून में पहली बार संगठित अपराधों को परिभाषित किया गया है, और मैरिटल रेप को हटा दिया गया है. महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए सजा को और बढ़ा दिया गया है. आत्महत्या की कोशिश को सजा के दायरे में बरकरार रखा गया है. इसके अलावा नए कानून में आतंकवाद को परिभाषित किया गया है. इनमें डिजिटल साक्ष्य के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक कार्रवाई को भी मान्यता मिली है.

60-90 दिन हुई हिरासत की अवधि (Period Of Detention)

तीन नए कानूनों में से एक ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ के तहत हिरासत की अवधि को 15 दिन से बढ़ाकर 60-90 दिन कर दिया गया है. फरार अपराधी की गैरमौजूदगी में भी सुनवाई की इजाजत दी गई है. हालांकि, लोग इन 3 नए कानूनों का विरोध कर रहे हैं. उनका तर्क है कि ये प्रावधान न्याय की प्रक्रिया को कमजोर कर सकते हैं. साथ ही उनका मानना है कि इससे गैर-हिंदी भाषी राज्यों के लिए मुश्किल हो सकती है.

नए कानूनों को लेकर असमंजस में दिल्ली बार एसोसिएशन (Bar Council of Delhi)

तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक जैसे राज्यों ने नए कानूनों के लागू होने को रोकने के लिए केंद्र को पत्र लिखा है. वहीं, दिल्ली बार एसोसिएशन ने भी नए कानूनों को टालने के लिए केंद्र को लेटर लिखा है. देश भर में वकीलों की कानूनी शिक्षा और कामकाज को कंट्रोल करने वाले बार काउंसिल ऑफ इंडिया यानि BCI ने सरकार से वकीलों की चिंताओं को दूर करने की अपील की है. सोमवार से लागू हुए इन तीन नए आपराधिक कानूनों को लेकर लोगों की राय अलग-अलग हैं. कुछ लोग इन्हें नागरिकों के अधिकारों का हनन बता रहे हैं तो कई इन्हें न्याय प्रणाली में बड़ा सुधार बता रहे हैं.

नए कानूनों पर वकीलों की राय

इन नए कानूनों को लेकर वकील रेबेका जॉन, वकील कामिनी जायसवाल और विशाल दुबे ने कहा है कि इन कानूनों में मूल रूप से सब समान है, अगर कुछ बदला है तो वह है बस धाराओं का स्थान. इसके लिए हमें फिर से सेक्शन को सीखना होगा. देखा जाए तो यह सिर्फ कट-एंड-पेस्ट का काम है.

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