CM Yogi: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को पिछली राज्य सरकारों पर आरोप लगाया कि उनके पास काम करने के लिए न तो कोई नीति थी और न ही कोई नीयत. उन्होंने हर संस्था पर माफिया का कब्ज़ा होने दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद कर दिया. उत्तर प्रदेश विधान परिषद (UPLC) चुनावों से पहले शिक्षकों और स्नातकों की एक बैठक को संबोधित करते हुए, जिसके लिए मतदान 23 अक्टूबर को होना है, आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य की पिछली सरकारों के पास न तो कोई नीति थी और न ही कोई नीयत. उनमें काम करने की इच्छाशक्ति की कमी थी. हर संस्था पर माफिया का कब्ज़ा था.
भर्ती आयोगों में अयोग्य लोगों को अध्यक्ष की कमान
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने भर्ती आयोगों के अध्यक्ष के रूप में अयोग्य लोगों को नियुक्त किया. उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए, एक ऐसे व्यक्ति को UPPSC (उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग) का अध्यक्ष बना दिया गया, जो तय मानदंडों को पूरा नहीं करता था. जब UPPSC के नतीजे घोषित हुए, तो चुने गए 86 SDM में से 56 एक ही जाति के थे. आदित्यनाथ ने बताया कि जो व्यक्ति टॉपर बना था, उसने 10वीं, 12वीं और BA की परीक्षाओं में केवल थर्ड डिवीज़न हासिल की थी.
सपा सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को किया बर्बाद
आदित्यनाथ ने कहा कि सपा सरकार के कार्यकाल में परीक्षाएं इस तरह से आयोजित की जाती थीं कि जो लोग वास्तव में परीक्षा में शामिल हुए थे, उनका कभी पता ही नहीं चल पाता था, जबकि ऐसे लोग, जो कभी परीक्षा में बैठे ही नहीं थे, वे नियुक्ति पत्र लेकर नौकरी ज्वाइन करने आ जाते थे. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सपा शिक्षा की घोषित दुश्मन है. उन्होंने कहा कि आज यूपी को किसी पहचान की जरूरत नहीं है, बल्कि, जिन लोगों ने उत्तर प्रदेश के लिए पहचान का संकट पैदा किया था, वे खुद अब अपनी पहचान के लिए संघर्ष कर रहे हैं.
आवागमन में हुआ सुधार
मुख्यमंत्री ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को कटघरे में खड़ा करने की एक बुरी प्रवृत्ति सामने आई है. यह चुनाव उसका भी जवाब होना चाहिए. यह चुनाव EVM के बजाय बैलेट पेपर से हो रहा है. आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि परिणाम न्याय के पक्ष में हो. मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘डबल इंजन’ सरकार के सत्ता में आने के बाद BJP ने रायबरेली में AIIMS और लखीमपुर खीरी, अमेठी, हरदोई, प्रतापगढ़ तथा सुल्तानपुर जिलों में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए. उन्होंने कहा कि ये बेहतरीन शिक्षण संस्थान हैं और कनेक्टिविटी में भी काफी सुधार हुआ है. पांच साल पहले लखनऊ से प्रयागराज का सफर लोगों के लिए किसी बुरे सपने जैसा था. आज आप वही दूरी सिर्फ 2.5 से 3 घंटे में तय कर सकते हैं.
