22 Dec 2025

'ये मय-कदा है यहां हैं गुनाह जाम-ब-दस्त...' पढ़ें अली सरदार जाफ़री के दिल जीत लेने वाले शेर.

चमन में आवारा

तू वो बहार जो अपने चमन में आवारा, मैं वो चमन जो बहाराँ के इंतिज़ार में है.

गुनाह जाम-ब-दस्त

ये मय-कदा है यहां हैं गुनाह जाम-ब-दस्त, वो मदरसा है वो मस्जिद वहाँ मिलेगा सवाब.

जन्नत की बहार

इसी दुनिया में दिखा दें तुम्हें जन्नत की बहार, शैख़ जी तुम भी ज़रा कू-ए-बुताँ तक आओ.

लहू गाता है

शब के सन्नाटे में ये किस का लहू गाता है, सरहद-ए-दर्द से ये किस की सदा आती है.

माथे से किरन

फूटने वाली है मज़दूर के माथे से किरन, सुर्ख़ परचम उफ़ुक़-ए-सुब्ह पे लहराते हैं.

तसव्वुरात-ए-कुहन 

दिल-ओ-नज़र को अभी तक वो दे रहे हैं फ़रेब, तसव्वुरात-ए-कुहन के क़दीम बुत-ख़ाने.