28 Feb 2026

'मां मुझे देख के नाराज़ न हो जाए कहीं...' पढ़ें अंजुम रहबर के दिल जीत लेने वाले शेर.

इत्तिफाक बिछड़ना

मिलना था इत्तिफाक बिछड़ना नसीब था, वो उतनी दूर हो गया जितना करीब था.

मुझे पहचानती

कुछ दिन से ज़िंदगी मुझे पहचानती नहीं, यूं देखती है जैसे मुझे जानती नहीं.

इल्ज़ाम आइनों

सच बात मान लीजिए चेहरे पे धूल है, इल्ज़ाम आइनों पे लगाना फ़ुज़ूल है.

चांदी की क़ब्र

दफ़ना दिया गया मुझे चांदी की क़ब्र में, मैं जिस को चाहती थी वो लड़का गरीब था.

सर पे आंचल

 मां मुझे देख के नाराज़ न हो जाए कहीं, सर पे आंचल नहीं होता है तो डर होता है.

दुनिया के साथ 

तुझ को दुनिया के साथ चलना है, तू मिरे साथ चल न पाएगा.

उसी तरफ

'अंजुम' तुम्हारा शहर जिधर है उसी तरफ, इक रेल जा रही थी कि तुम याद आ गए.

भुला रही थी

तुम को भुला रही थी कि तुम याद आ गए, मैं ज़हर खा रही थी कि तुम याद गए.

 गुनगुना रही थी

कल शाम छत पे मीर-तक़ी-'मीर' की गजल, मैं गुनगुना रही थी कि तुम याद आ गए.