28 Dec 2025
'गुज़रने ही न दी वो रात मैं ने...' पढ़ें शहज़ाद अहमद के बेहतरीन शेर.
आता हूँ
छोड़ने मैं नहीं जाता उसे दरवाज़े तक, लौट आता हूँ कि अब कौन उसे जाता देखे.
ख़ूब-सूरत
ये समझ के माना है सच तुम्हारी बातों को, इतने ख़ूब-सूरत लब झूट कैसे बोलेंगे.
घड़ी पर
गुज़रने ही न दी वो रात मैं ने, घड़ी पर रख दिया था हाथ मैं ने.
ख़राबे में दुनिया
हज़ार चेहरे हैं मौजूद आदमी ग़ाएब, ये किस ख़राबे में दुनिया ने ला के छोड़ दिया.
ख़ुदाया मिरी
सब की तरह तू ने भी मिरे ऐब निकाले, तू ने भी ख़ुदाया मिरी निय्यत नहीं देखी.
पेश-ए-नज़र
हमारे पेश-ए-नज़र मंज़िलें कुछ और भी थीं, ये हादसा है कि हम तेरे पास आ पहुंचे.