19 Jan 2026

'क्या क्या हुआ है हम से जुनूँ में न पूछिए...' पढ़ें असरार-उल-हक़ मजाज़ के बेहतरीन शेर.

 अहल-ए-नज़र

रोएं न अभी अहल-ए-नज़र हाल पे मेरे, होना है अभी मुझ को ख़राब और ज़ियादा.

कभी आसमाँ

क्या क्या हुआ है हम से जुनूँ में न पूछिए, उलझे कभी ज़मीं से कभी आसमाँ से हम.

शर्मसार करना 

हुस्न को शर्मसार करना ही, इश्क़ का इंतिक़ाम होता है.

आँख से आँख

आँख से आँख जब नहीं मिलती, दिल से दिल हम-कलाम होता है.

इंसाँ की जुस्तुजू 

हिन्दू चला गया न मुसलमां चला गया, इंसाँ की जुस्तुजू में इक इंसां चला गया.

मिरी आँख

फिर मिरी आँख हो गई नमनाक, फिर किसी ने मिज़ाज पूछा है.

मिरी बर्बादियों

मिरी बर्बादियों का हम-नशीनो, तुम्हें क्या ख़ुद मुझे भी ग़म नहीं है.

नाख़ुदा दुनिया

तुम्हीं तो हो जिसे कहती है नाख़ुदा दुनिया, बचा सको तो बचा लो कि डूबता हूँ मैं.

 हाए वो वक़्त

हाए वो वक़्त कि जब बे-पिए मद-होशी थी, हाए ये वक़्त कि अब पी के भी मख़्मूर नहीं.