17 April 2026
क्या अक्षर कुमार की Bhooth Bangla में नहीं है कोई दम? विरासत का नहीं कर पाई कोई सम्मान!
अक्षय कुमार
अगर आप भी अक्षय कुमार की ‘भूत बंगला’ का बेसब्री से इंतज़ाकर कर रहे थे, तो जरा रुकिए. इस फिल्म से ‘भूल भुलैया’ वाली उम्मीद लेकर थिएटर्स में बिल्कुल मत जाइएगा.
एक बुरा सपना
फिल्म के क्लाइमेक्स से ठीक पहले मिथिला पालकर का कैरेक्टर जिशू सेनगुप्ता से पूछता है, पापा, ये क्या हो रहा है? जवाब मिलता है, ये सब एक बुरा सपना है. सच तो ये है कि फिल्म देखते टाइम ऑडियन्स को भी कुछ ऐसा ही फील होता है.
क्या है कहानी?
कहानी शुरू होती है मंगलपुर नाम के एक गांव से, जहां एक कहानी फेमस है कि ‘वधुसुर’ नाम का एक राक्षस नई नवेली दुल्हनों को उठा ले जाता है. इसी डर से वहां कोई शादी नहीं करता.
कर्ज में डूबा
अब एंट्री होती है हमारे हीरो अर्जुन यानी अक्षय कुमार की, जो लंदन में रहता है और कर्ज में डूबा हुआ है. वैसे फिल्म में 49 साल के जिशू सेनगुप्ता, 58 साल के अक्षय कुमार के पापा के रोल में हैं.
मिथिला पालकर
अर्जुन को मंगलपुर में अपने पुरखों का एक महल विरासत में मिलता है. वो अपनी बहन मीरा यानी मिथिला पालकर की शादी वहीं करने का फैसला करता है और तैयारियों के लिए पहले ही गांव पहुंच जाता है.
मजाक ठूंसने
इसके बाद जो शुरू होता है, उसे कॉमेडी कहना मुश्किल है और गलत भी. फिल्म पूरी तरह से पटरी से उतरी हुई लगती है, क्योंकि हंसी के नाम पर इसमें जबरदस्ती के मजाक ठूंसने की कोशिश की गई है.
तब्बू
फिल्म में वही पुरानी हवेली वाला सेट है, ‘हरे राम हरे कृष्णा’ जैसा गाना है और परेश रावल, राजपाल यादव, तब्बू और स्वर्गीय असरानी जैसे शानदार कलाकार है.
भूल भुलैया
अक्षय और प्रियदर्शन की जोड़ी को देखकर लोगों को लगा था कि शायद ‘भूल भुलैया’ वाला जादू फिर से चलेगा, लेकिन अफसोस कि, ऐसा नहीं हुआ.
20 मिनट
फिल्म का प्लॉट इतना वीक है कि आप पहले 20 मिनट में ही समझ जाएंगे कि आगे क्या होने वाला है. यानी पिक्चर में कोई दम नहीं है. इसमें ‘हंगामा’, ‘चुप चुप के’ और ‘स्त्री’ जैसी फिल्मों की झलक दिखाने की कोशिश की गई है, लेकिन ये उनमे से किसी भी फिल्म के लेवल को छू नहीं पाती.