14 Feb 2026

'आईने में वो देख रहे थे बहार-ए-हुस्न...' पढ़ें हसरत मोहानी के चुनिंदा शेर.

तेरी बरक़रार

आरज़ू तेरी बरक़रार रहे, दिल का क्या है रहा रहा न रहा.

 बेवफ़ा चाहता हूं

वफ़ा तुझ से ऐ बेवफ़ा चाहता हूं, मिरी सादगी देख क्या चाहता हूं.

मिरा ख़याल

आईने में वो देख रहे थे बहार-ए-हुस्न, आया मिरा ख़याल तो शर्मा के रह गए.

तिरी आरज़ू 

हम क्या करें अगर न तिरी आरज़ू करें, दुनिया में और भी कोई तेरे सिवा है क्या.

बदली मेरी नीयत

 बरसात के आते ही तौबा न रही बाक़ी, बादल जो नज़र आए बदली मेरी नीयत भी.

पड़ गया जुनूं

ख़िरद का नाम जुनूँ पड़ गया जुनूँ का ख़िरद, जो चाहे आप का हुस्न-ए-करिश्मा-साज़ करे.

 सज़ा है तुम्हारे 

इक़रार है कि दिल से तुम्हें चाहते हैं हम, कुछ इस गुनाह की भी सज़ा है तुम्हारे पास.

इज़हार-ए-मुद्दआ

कट गई एहतियात-ए-इश्क़ में उम्र, हम से इज़हार-ए-मुद्दआ न हुआ.

 दोपहर की धूप

दोपहर की धूप में मेरे बुलाने के लिए, वो तिरा कोठे पे नंगे पाँव आना याद है.