22 March 2026

भारत के उर्वरक क्षेत्र पर संकट, गैस की कमी से यूरिया उत्पादन में 50% की गिरावट.

होर्मुज जलडमरूमध्य

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली गैस आपूर्ति बाधित हो गई है, जिसका सीधा असर भारत के उर्वरक क्षेत्र पर पड़ा है.

 यूरिया संयंत्र

उद्योग सूत्रों के अनुसार, देश के प्रमुख यूरिया संयंत्र वर्तमान में अपनी आधी क्षमता (50%) पर चलने को मजबूर हैं. पश्चिम एशिया तनाव के कारण कतर से होने वाली एलएनजी आपूर्ति में बाधा आ गई है. 

कटौती कर दी

आपूर्तिकर्ताओं ने युद्ध जैसे हालातों के बीच कार्गो पहुंचाने में असमर्थता जताई है. GAIL, IOC और BPCL जैसे वितरकों ने उर्वरक इकाइयों को दी जाने वाली गैस आपूर्ति में 60 से 65% तक की कटौती कर दी है. 

अमोनिया-यूरिया

कम लोड पर चलने के कारण अमोनिया-यूरिया ट्रेनों की थर्मल दक्षता गिर गई है, जिससे ऊर्जा की खपत 40% तक बढ़ गई है. 

बुवाई सीजन

विश्लेषकों का कहना है कि यदि यह तनाव लंबे समय तक चला तो आगामी बुवाई सीजन के लिए यूरिया की उपलब्धता और कीमतों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. 

ऊर्जा खर्च 

एक प्लांट संचालन प्रबंधक ने कहा कि इस पैमाने के संयंत्रों को इच्छानुसार ऊपर और नीचे रैंप करने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है. इन परिस्थितियों में काम करने का मतलब है कि आप कम उर्वरक का उत्पादन करने के लिए अधिक ऊर्जा खर्च कर रहे हैं. 

पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड

मालूम हो कि पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड भारत सरकार की एक तेल और गैस कंपनी है जिसका उद्देश्य द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात करना और देश में एलएनजी टर्मिनल स्थापित करना है. 

GAIL

ट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड द्वारा गैस आपूर्ति रोकने के कारण और गेल (GAIL) के देर रात सूचना देने से उर्वरक संयंत्रों का संचालन बिगड़ गया है. 

मूल्य निर्धारण

 1 मार्च 2026 से नए अनंतिम मूल्य निर्धारण ने उत्पादकों के लिए वित्तीय अनिश्चितता पैदा कर दी है. भारत यूरिया के दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है.