09 May 2026

'सुबूत है ये मोहब्बत की सादा-लौही का...' पढ़ें जोश मलीहाबादी के लाजवाब शेर.

 हुक्म-ए-रवानी

कश्ती-ए-मय को हुक्म-ए-रवानी भी भेज दो, जब आग भेज दी है तो पानी भी भेज दो.

आँखें हमें बख़्शी

सिर्फ़ इतने के लिए आँखें हमें बख़्शी गईं, देखिए दुनिया के मंज़र और ब-इबरत देखिए.

सब्र आज़माने

वहां से है मिरी हिम्मत की इब्तिदा वल्लाह, जो इंतिहा है तिरे सब्र आज़माने की.

सुबूत है ये 

सुबूत है ये मोहब्बत की सादा-लौही का, जब उस ने वादा किया हम ने ए'तिबार किया.

 तिरे हुस्न 

 इस दिल में तिरे हुस्न की वो जल्वागरी है, जो देखे है कहता है कि शीशे में परी है.

निगह-ए-लुत्फ़

वो करें भी तो किन अल्फ़ाज़ में तेरा शिकवा, जिन को तेरी निगह-ए-लुत्फ़ ने बर्बाद किया.

कशमकश-ए-दहर 

 सोज़-ए-ग़म दे के मुझे उस ने ये इरशाद किया, जा तुझे कशमकश-ए-दहर से आज़ाद किया.

उजड़े हुए घर

अब तक न ख़बर थी मुझे उजड़े हुए घर की, वो आए तो घर बे-सर-ओ-सामाँ नज़र आया.

ये हुक्म है

फ़ुगां कि मुझ ग़रीब को हयात का ये हुक्म है, समझ हर एक राज़ को मगर फ़रेब खाए जा.