19 March 2026
ट्रेंडिंग साड़ियों को रखें साइड, अब पहनें भारत की ये पारंपरिक Sarees
कुनबी चेक-गोवा
जब आप गोवा के बारे में सोचते हैं, तो आपके दिमाग में खूबसूरत बीच की तस्वीरें आती हैं. लेकिन क्या आपने ‘कुनबी’ के बारे में सुना है? आदिवासी समुदायों की ये ट्रेडिशनल लाल और काले चेक वाली साड़ी ‘बैकस्ट्रैप लूम’ पर बुनी जाती थी.
सिद्दिपेट गोल्लाभामा-तेलंगाना
ये साड़ी कपड़े पर कहानी कहती है. इसमें एक ‘गोल्लाभामा’ यानी एक दूध बेचने वाली महिला की खूबसूरत तस्वीरें बनी होती हैं जो सिर पर मटका ले जा रही होती हैं. खास बात ये है कि ये कोई बाद में की गई कढ़ाई नहीं है, बल्कि बुनकर इसे कपड़े की बुनाई के साथ ही धागों से तैयार करते हैं.
औरंगाबाद का हिमरू
मुगल काल की जड़ों से जुड़ा ‘हिमरू’ सिल्क और कॉटन का शानदार कॉम्बिनेशन है. फारसी शब्द ‘हम-रूह’ का अर्थ है ‘समान’, यानी जो प्योर रेशम जैसा दिखे. ये आपको भारी ब्रोकेड जैसा रॉयल लुक देता है.
गुजरात का मशरू
पाटन, गुजरात के कारीगरों ने ‘मशरू’ का इन्वेंशन एक खास वजह से किया था. दरअसल, धार्मिक नियमों के मुताबिक, रेशम को सीधे स्किन से छूने की परमिशन नहीं थी.
महाराष्ट्र की करवत काटी
जब महाराष्ट्र की साड़ियों की बात आती है, तो सबका ध्यान पैठणी पर ही जाता है. वहीं, महाराष्ट्र की ‘करवत काटी’ को अब लोग भूलते जा रहे हैं. प्योर टसर सिल्क से बनी इस साड़ी का नाम इसके ‘आरी के दांत’ यानी करवत जैसे दिखने वाले बॉर्डर से पड़ा है.
कर्नाटक-पट्टेड़ा अंचू
नॉर्थ कर्नाटक की ये साड़ी 10वीं शताब्दी जितनी पुरानी है. ये साड़ी टिकाऊ फैशन का बेहतरीन एग्जांपल है. इसके बोल्ड मस्टर्ड या लाल बॉर्डर और चेक वाली बॉडी इसकी खासियत है. सबसे अच्छी बात ये है कि इस साड़ी को दोनों तरफ से पहना जा सकता है.