18 April 2026
'कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था...' पढ़ें गुलज़ार के बेहतरीन शेर.
तुम्हारी राहों
हम ने अक्सर तुम्हारी राहों में, रुक कर अपना ही इंतिज़ार किया.
शाख़ से लम्हे
हाथ छूटें भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते, वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोड़ा करते.
वाक़िआ तुम्हारा
कल का हर वाक़िआ तुम्हारा था, आज की दास्ताँ हमारी है.
उमडती बारिश
मैं चुप कराता हूँ हर शब उमडती बारिश को, मगर ये रोज़ गई बात छेड़ देती है.
तुम्हारे ख़्वाब
तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं, सज़ाएँ भेज दो हम ने ख़ताएँ भेजी हैं.
मिले अफ़्साने
ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में, एक पुराना ख़त खोला अनजाने में.
आहट सुनता हूँ
दिल पर दस्तक देने कौन आ निकला है, किस की आहट सुनता हूँ वीराने में.
सारी रात
एक ही ख़्वाब ने सारी रात जगाया है, मैं ने हर करवट सोने की कोशिश की.
दिल उदास
जब भी ये दिल उदास होता है, जाने कौन आस-पास होता है.