22 Feb 2026

'तू कहीं हो दिल-ए-दीवाना वहां पहुंचेगा...' पढ़ें बहादुर शाह ज़फ़र के दिल जीत लेने वाले शेर.

ज़माने में नगीं 

मेहनत से है अज़्मत कि ज़माने में नगीं को, बे-काविश-ए-सीना न कभी नामवरी दी.

दिल-ए-दीवाना

तू कहीं हो दिल-ए-दीवाना वहां पहुंचेगा, शम्अ होगी जहाँ परवाना वहां पहुंचेगा.

तिरा सब्र

ले गया छीन के कौन आज तिरा सब्र ओ क़रार, बे-क़रारी तुझे ऐ दिल कभी ऐसी तो न थी.

जिस तरह 

दिल को दिल से राह है तो जिस तरह से हम तुझे, याद करते हैं करे यूँ ही हमें भी याद तू.

रस्ता सँभल

इतना न अपने जामे से बाहर निकल के चल, दुनिया है चल-चलाव का रस्ता सँभल के चल.

ताज-ए-शाहाना

 न दरवेशों का ख़िर्क़ा चाहिए न ताज-ए-शाहाना, मुझे तो होश दे इतना रहूँ मैं तुझ पे दीवाना.

इश्क़ का

मर्ग ही सेहत है उस की मर्ग ही उस का इलाज, इश्क़ का बीमार क्या जाने दवा क्या चीज़ है.

नक़्शा खींचना

चाहिए उस का तसव्वुर ही से नक़्शा खींचना, देख कर तस्वीर को तस्वीर फिर खींची तो क्या.