17 April 2026

'हर तरफ़ शोर उसी नाम का है दुनिया में...' पढ़ें जावेद अख्तर के सदाबहार शेर.

अजब कारोबार

ये ज़िंदगी भी अजब कारोबार है कि मुझे, ख़ुशी है पाने की कोई न रंज खोने का.

तिरा इंतिज़ार 

खुला है दर प तिरा इंतिज़ार जाता रहा, ख़ुलूस तो है मगर ए'तिबार जाता रहा.

मिली है तनहाई

आगही से मिली है तनहाई, आ मिरी जान मुझ को धोका दे.

 दुनिया में

हर तरफ़ शोर उसी नाम का है दुनिया में, कोई उस को जो पुकारे तो पुकारे कैसे.

मिरे ख़्वाब

छत की कड़ियों से उतरते हैं मिरे ख़्वाब मगर, मेरी दीवारों से टकरा के बिखर जाते हैं.

जंगल में फिरते

दुख के जंगल में फिरते हैं कब से मारे मारे लोग, जो होता है सह लेते हैं कैसे हैं बेचारे लोग.

जंगल में फिरते

दुख के जंगल में फिरते हैं कब से मारे मारे लोग, जो होता है सह लेते हैं कैसे हैं बेचारे लोग.

दीवार गल

मैं क़त्ल तो हो गया तुम्हारी गली में लेकिन, मिरे लहू से तुम्हारी दीवार गल रही है.

ख़ून से सींची

ख़ून से सींची है मैं ने जो ज़मीं मर मर के, वो ज़मीं एक सितम-गर ने कहा उस की है.

मुस्कुराता है

है पाश पाश मगर फिर भी मुस्कुराता है, वो चेहरा जैसे हो टूटे हुए खिलौने का.