11 Jan 2026

'हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं...' पढ़ें जिगर मुरादाबादी के दिल जीत लेने वाले शेर.

इश्क़ नहीं

ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे, इक आग का दरिया है और डूब के जाना है.

 ज़माना ख़ुद

हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं, हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं.

जा रहा हूँ

दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं, कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं.

अहल-ए-दिल

 अपना ज़माना आप बनाते हैं अहल-ए-दिल, हम वो नहीं कि जिन को ज़माना बना गया.

तेरी आँखों 

तेरी आँखों का कुछ क़ुसूर नहीं, हाँ मुझी को ख़राब होना था.

तूफ़ानों में

जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं, वही दुनिया बदलते जा रहे हैं.

तस्वीर खींच दूं 

तिरे जमाल की तस्वीर खींच दूं लेकिन, ज़बां में आँख नहीं आँख में ज़बान नहीं.

आलम है हुस्न

इतने हिजाबों पर तो ये आलम है हुस्न का, क्या हाल हो जो देख लें पर्दा उठा के हम.

आग़ाज़-ए-मोहब्बत

आग़ाज़-ए-मोहब्बत का अंजाम बस इतना है, जब दिल में तमन्ना थी अब दिल ही तमन्ना है.