21 Dec 2025

'लगता नहीं है दिल मिरा उजड़े दयार में...' पढ़ें बहादुर शाह ज़फ़र के शानदार शेर.

तुम्हारी याद

तुम ने किया न याद कभी भूल कर हमें, हम ने तुम्हारी याद में सब कुछ भुला दिया.

बद-नसीब 'ज़फ़र'

कितना है बद-नसीब 'ज़फ़र' दफ़्न के लिए, दो गज़ ज़मीन भी न मिली कू-ए-यार में.

उजड़े दयार 

लगता नहीं है दिल मिरा उजड़े दयार में, किस की बनी है आलम-ए-ना-पाएदार में.

ऐ वाए इंक़लाब

 ऐ वाए इंक़लाब ज़माने के जौर से, दिल्ली 'ज़फ़र' के हाथ से पल में निकल गई.

ज़माने में नगीं

मेहनत से है अज़्मत कि ज़माने में नगीं को, बे-काविश-ए-सीना न कभी नामवरी दी..

दिल-ए-दीवाना

तू कहीं हो दिल-ए-दीवाना वहां पहुंचेगा, शम्अ होगी जहाँ परवाना वहाँ पहुँचेगा.