17 Dec 2025

'बहाने और भी होते जो ज़िंदगी के लिए...' पढ़ें मजरूह सुल्तानपुरी के दिल जीत लेने वाले शेर.

सब की जानिब

ऐसे हंस-हंस के न देखा करो सब की जानिब, लोग ऐसी ही अदाओं पे फ़िदा होते हैं.

कोई सहारा

कोई हम-दम न रहा कोई सहारा न रहा, हम किसी के न रहे कोई हमारा न रहा.

आवारा कर दिया

गम-ए-हयात ने आवारा कर दिया वरना, थी आरज़ू कि तिरे दर पे सुब्ह ओ शाम करें.

ज़िंदगी के लिए

बहाने और भी होते जो ज़िंदगी के लिए, हम एक बार तिरी आरज़ू भी खो देते.

 सफ़ीना मिरा

 बचा लिया मुझे तूफां की मौज ने वरना, किनारे वाले सफ़ीना मिरा डुबो देते.

सरों के चराग

 सुतून-ए-दार पे रखते चलो सरों के चराग, जहां तलक ये सितम की सियाह रात चले.