18 April 2026

‘मटका किंग’ से विजय वर्मा आए लोगों का दिल जीतने.

रीयल घटनाओं

बॉलीवुड में इन दिनों पीरियड ड्रामा और रीयल घटनाओं से इंस्पायर कहानियों का ट्रेंड चल रहा है. इसी लाइन में ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई है वेब सीरीज ‘मटका किंग’

ताश के पत्तों 

नागराज पोपटराव मंजुले के डायरेक्शन में बनी ये 8 एपिसोड की सीरीज 1960 और 70 के दशक के उस बॉम्बे की सैर कराती है, जहां किस्मत ताश के पत्तों और मटके से निकलने वाले नंबरों पर टिकी होती थी.

बृज भट्टी

विजय वर्मा ने इस सीरीज में ‘बृज भट्टी’ का कैरेक्टर निभाकर एक बार फिर साबित कर दिया है कि वो एक्टिंग के असली किंग हैं.

 खून-पसीने

बृज एक सूती मिल मालिक लालजीभाई के अंडर काम करता है, जो मजदूरों के खून-पसीने की कमाई को सट्टे के जरिए लूटता है. एक दिन बृज का सब्र जवाब दे जाता है और वो खुद का ‘मटका’ बिजनेस शुरू करने का फैसला करता है.

न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज

बृज का मटका गेम थोड़ा अलग था. उसने न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज रेट्स पर डिपेंड रहने के बजाय तीन पत्तों को खींचकर ‘लकी ड्रा’ निकालने की ट्रांसपेरेंट सिस्टम शुरू किया.

जुआरियों को बोरियत 

उसका मानना था कि जुआरियों को बोरियत नहीं होनी चाहिए और खेल में लगातार बदलाव जरूरी है. यहीं से शुरू होता है बृज भट्टी के ‘मटका किंग’ बनने का सफर, जो फाइनेंशियल क्राइसेस से लड़ते हुए पूरे देश की सट्टेबाजी की दुनिया का बेताज बादशाह बन जाता है.

स्क्रीन पर प्रोबेबिलिटी

इस सीरीज की सबसे बड़ी ताकत विजय वर्मा हैं. उनकी एक्टिंग इतनी बेहतरीन है कि जब वो स्क्रीन पर प्रोबेबिलिटी का गणित समझाते हैं, तो लगता है कि काश स्कूल में हमारे टीचर भी ऐसे ही होते.

बहुत इम्प्रेसिव

एक आम आदमी से ‘भगवान’ जैसा रुतबा पाने तक का उनका सफर बहुत ही इम्प्रेसिव है. उनका एक डायलॉग है कि, मैं चाहूं तो दो दिन में पूरे देश का कर्जा उतार सकता हूं.

एंग्री यंग मैन

उनका कैरेक्टर कॉन्फिडेंस और पावर को सही में बहुत शानदार तरीके से दिखाता है. विजय ने बृज के रोल में वो ‘एंग्री यंग मैन’ वाला स्वैग डाला है, जो हमें 70 के दशक के अमिताभ बच्चन की याद दिलाता है.