'हम नहीं थे तो क्या कमी थी यहां...' पढ़ें मुनव्वर राना के लाजवाब शेर.

30 Dec 2025

बर्बाद कर दिया हमें परदेस ने मगर, माँ सब से कह रही है कि बेटा मज़े में है.

परदेस 

हम नहीं थे तो क्या कमी थी यहां, हम न होंगे तो क्या कमी होगी.

क्या कमी थी

फ़रिश्ते आ कर उन के जिस्म पर ख़ुश्बू लगाते हैं, वो बच्चे रेल के डिब्बों में जो झाड़ू लगाते हैं.

जिस्म पर ख़ुश्बू

लिपट जाता हूं मां से और मौसी मुस्कुराती है, मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूँ हिन्दी मुस्कुराती है.

हिन्दी मुस्कुराती

तमाम जिस्म को आंखें बना के राह तको, तमाम खेल मोहब्बत में इंतिज़ार का है.

मोहब्बत में इंतिज़ार

तुम्हारे शहर में मय्यत को सब कांधा नहीं देते, हमारे गाँव में छप्पर भी सब मिल कर उठाते हैं.

कांधा नहीं