08 March 2026

'वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहां में...' पढ़ें निदा फ़ाज़ली के दिल जीत लेने वाले शेर.

इंसान न बनने 

कोई हिन्दू कोई मुस्लिम कोई ईसाई है, सब ने इंसान न बनने की क़सम खाई है.

क्यूँ नहीं जाता

वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहां में, जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँ नहीं जाता.

भूलना आसान 

तुम से छुट कर भी तुम्हें भूलना आसान न था, तुम को ही याद किया तुम को भुलाने के लिए.

कई महफ़िलें 

एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक, जिस को भी पास से देखोगे अकेला होगा.

चुप-चाप क्यूं 

 हर एक बात को चुप-चाप क्यूं सुना जाए, कभी तो हौसला कर के नहीं कहा जाए.

चुप-चाप क्यूं 

 हर एक बात को चुप-चाप क्यूं सुना जाए, कभी तो हौसला कर के नहीं कहा जाए.

ढूँडती रहती हैं

सब कुछ तो है क्या ढूँडती रहती हैं निगाहें, क्या बात है मैं वक़्त पे घर क्यूँ नहीं जाता.

आदमी अच्छा

उस के दुश्मन हैं बहुत आदमी अच्छा होगा, वो भी मेरी ही तरह शहर में तन्हा होगा.

मोहब्बत नहीं

दिल में न हो जुरअत तो मोहब्बत नहीं मिलती, ख़ैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती.