17 March 2026

'शहर क्या देखें कि हर मंज़र में जाले पड़ गए...' पढ़ें राहत इंदौरी के दिल जीत लेने वाले शेर.

मुलाक़ात का जादू

इक मुलाक़ात का जादू कि उतरता ही नहीं, तिरी ख़ुशबू मिरी चादर से नहीं जाती है.

हिमायत में ग़ज़ल

रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं, रोज़ शीशों से कोई काम निकल पड़ता है.

छोड़ दूँगा

मज़ा चखा के ही माना हूँ मैं भी दुनिया को, समझ रही थी कि ऐसे ही छोड़ दूँगा उसे.

तमन्ना भी

तुझ से मिलने की तमन्ना भी बहुत है लेकिन, आने जाने में किराया भी बहुत लगता है.

मंज़र में जाले

शहर क्या देखें कि हर मंज़र में जाले पड़ गए, ऐसी गर्मी है कि पीले फूल काले पड़ गए.

पथराव रोक 

ख़याल था कि ये पथराव रोक दें चल कर, जो होश आया तो देखा लहू लहू हम थे.

इज़्ज़त बिगाड़ 

हमारे पीर 'तक़ी-मीर' ने कहा था कभी, मियाँ ये 'आशिक़ी 'इज़्ज़त बिगाड़ देती है.

ज़िम्मेदारी

रात की धड़कन जब तक जारी रहती है, सोते नहीं हम ज़िम्मेदारी रहती है.

बिखर जाओ

सितारो आओ मिरी राह में बिखर जाओ, ये मेरा हुक्म है हालाँकि कुछ नहीं हूं मैं.