17 Dec 2025

'इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है...' पढ़ें मुनव्वर राना के सदाबहार शेर.

 तौहीन है ज़रा 

तुम्हारी आंखों की तौहीन है ज़रा सोचो, तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है.

फ़ुटपाथ पे अख़बार

सो जाते हैं फ़ुटपाथ पे अख़बार बिछा कर, मजदूर कभी नींद की गोली नहीं खाते.

ग़ुस्से में होती

इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है, मां बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है.

आंखों का समुंदर 

एक आंसू भी हुकूमत के लिए ख़तरा है, तुम ने देखा नहीं आंखों का समुंदर होना.

मिरी सैलाब

जब भी कश्ती मिरी सैलाब में आ जाती है, मां दुआ करती हुई ख़्वाब में आ जाती है.

खिदमत में लगा हूं

ये सोच के मां बाप की खिदमत में लगा हूं, इस पेड़ का साया मिरे बच्चों को मिलेगा.