03 Feb 2026
'तू कहीं हो दिल-ए-दीवाना वहां पहुंचेगा...' पढ़ें बहादुर शाह ज़फ़र के क्रांतिकारी शेर.
नामवरी दी
मेहनत से है अज़्मत कि ज़माने में नगीं को, बे-काविश-ए-सीना न कभी नामवरी दी.
दिल-ए-दीवाना
तू कहीं हो दिल-ए-दीवाना वहां पहुंचेगा, शम्अ होगी जहाँ परवाना वहाँ पहुँचेगा.
रस्ता सँभल
इतना न अपने जामे से बाहर निकल के चल, दुनिया है चल-चलाव का रस्ता सँभल के चल.
नक़्शा खींचना
चाहिए उस का तसव्वुर ही से नक़्शा खींचना, देख कर तस्वीर को तस्वीर फिर खींची तो क्या.
मजाल हमारी
क्या ताब क्या मजाल हमारी कि बोसा लें, लब को तुम्हारे लब से मिला कर कहे बग़ैर.
रक्खो कुदूरत
ग़ज़ब है कि दिल में तो रक्खो कुदूरत, करो मुँह पे हम से सफ़ाई की बातें.
मामूरा-ए-दुनिया
रोज़ मामूरा-ए-दुनिया में ख़राबी है 'ज़फ़र', ऐसी बस्ती को तो वीराना बनाया होता.
नसीम-ए-सहर
जा कहियो मेरा नसीम-ए-सहर, मिरा चैन गया मिरी नींद गई.
गरचे बनाया
ख़ाकसारी के लिए गरचे बनाया था मुझे, काश ख़ाक-ए-दर-ए-जानाना बनाया होता.