03 Feb 2026
'यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें...' पढ़ें निदा फ़ाज़ली के चुनिंदा शेर.
जादू का खिलौना
दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है, मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है.
सफ़र के हम
अपनी मर्ज़ी से कहाँ अपने सफ़र के हम हैं, रुख़ हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं.
ख़्वाब चंद
यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें, इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो.हैं.
सारे जहाँ
वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में, जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँ नहीं जाता.
महफ़िलें होती हैं
एक महफ़िल में कई महफ़िलें होती हैं शरीक, जिस को भी पास से देखोगे अकेला होगा.
चुप-चाप क्यूँ
हर एक बात को चुप-चाप क्यूँ सुना जाए, कभी तो हौसला कर के नहीं कहा जाए.