09 Feb 2026

'चाहिए ख़ुद पे यक़ीन-ए-कामिल...' पढ़ें शकील बदायूनी के चुनिंदा शेर.

ख़फ़ा हैं 

वो हम से ख़फ़ा हैं हम उन से ख़फ़ा हैं, मगर बात करने को जी चाहता है.

यक़ीन-ए-कामिल

चाहिए ख़ुद पे यक़ीन-ए-कामिल, हौसला किस का बढ़ाता है कोई.

 गुज़रा हुआ ज़माना

तुम फिर उसी अदा से अंगड़ाई ले के हँस दो, आ जाएगा पलट कर गुज़रा हुआ ज़माना.

तर्क-ए-मय 

तर्क-ए-मय ही समझ इसे नासेह, इतनी पी है कि पी नहीं जाती.