02 Feb 2026
'बुतों से तुझ को उमीदें ख़ुदा से नौमीदी...' पढ़ें अल्लामा इक़बाल के चुनिंदा शेर.
मयस्सर नहीं
जिस खेत से दहक़ाँ को मयस्सर नहीं रोज़ी, उस खेत के हर ख़ोशा-ए-गंदुम को जला दो.
पासबान-ए-अक़्ल
अच्छा है दिल के साथ रहे पासबान-ए-अक़्ल, लेकिन कभी कभी इसे तन्हा भी छोड़ दे.
उमीदें ख़ुदा
बुतों से तुझ को उमीदें ख़ुदा से नौमीदी, मुझे बता तो सही और काफ़िरी क्या है.
तर्ज़-ए-हुकूमत
जम्हूरियत इक तर्ज़-ए-हुकूमत है कि जिस में, बंदों को गिना करते हैं तौला नहीं करते.
दिल-नवाज़ जाँ
निगह बुलंद सुख़न दिल-नवाज़ जाँ पुर-सोज़, यही है रख़्त-ए-सफ़र मीर-ए-कारवाँ के लिए.
आँख में बाक़ी
हया नहीं है ज़माने की आँख में बाक़ी, ख़ुदा करे कि जवानी तिरी रहे बे-दाग़.
गोया मुसाफ़िर
ढूँडता फिरता हूँ मैं 'इक़बाल' अपने आप को, आप ही गोया मुसाफ़िर आप ही मंज़िल हूँ मैं.
अंदाज़-ए-बयाँ
अंदाज़-ए-बयाँ गरचे बहुत शोख़ नहीं है, शायद कि उतर जाए तिरे दिल में मिरी बात.
आसमाँ नहीं
बातिल से दबने वाले ऐ आसमाँ नहीं हम, सौ बार कर चुका है तू इम्तिहाँ हमारा.