03 March 2026
Iran War : स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद के बीच भारत को होगी तेल की किल्लत?
अयातुल्ला खामेनेई
मिडिल ईस्ट में इस समय भूचाल आ गया है. 28 फरवरी को हुए इजरायल और अमेरिका के सैन्य हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत हो गई है, जिसके बाद ईरान भी अक्रामक हो गया है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मूज
इजरायल और ईरान अब लगातार एक दूसरे पर मिसाइलें दाग रहे हैं. जब विश्व में इस तरह की जंग होती है तो इसका असर तेल व्यापार पर पड़ता है. वहीं ईरान ने भी अब ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मूज’ को बंद कर दिया है.
कच्चे तेल
दुनिया के कुल कच्चे तेल के समुद्री व्यापार का लगभग 20 से 25 प्रतिशत इसी रास्ते से होता है.
संकरा समुद्री मार्ग
स्ट्रेट ऑफ होर्मूज ईरान और ओमान के बीच एक संकरा समुद्री मार्ग है, जो दुनिया के सबसे जरूरी एनर्जी चोकपॉइंट्स में से एक है.
तेल और गैस
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनिया भर की तेल और गैस सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है. खाड़ी देश अपना ज्यादातर तेल व्यापार यहीं से करते हैं. भारत समेत एशिया के कई देशों का तेल यहां से आता है.
ईरान
ईरान ने यह रास्ता बंद करने का ऐलान कर दिया है. ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मूज बंद हो जाने से पूरी दुनिया के लिए मुश्किल खड़ी हो जाएगी और तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होगी.
भारत
ऐसे में सवाल उठता है कि किया भारत के लिए यह संकट तेल की किल्लत पैदा कर देगा? क्या भारत के पास अन्य विकल्प हैं और भारत के पास अभी कितना फ्यूल बैंक है.
ईरान युद्ध
भले ही ईरान पर US और इज़राइली मिलिट्री हमलों के बाद तेज़ी से हो रहे डेवलपमेंट यह बताते हैं कि यह लड़ाई ज़्यादा दिन नहीं चलेगी, लेकिन टॉप अधिकारियों और एनालिस्ट ने कहा कि अगर तनाव बढ़ता है तो नई दिल्ली के पास इमरजेंसी प्लान हैं.
होर्मुज की पतली
भारत पर ज़्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि उसके पास पहले से ही फ्यूल की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए सप्लाई है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर होर्मुज की पतली स्ट्रेट में लंबे समय तक रुकावट या बंद होने की स्थिति में, देश अपने अलग-अलग सप्लाई सोर्स का इस्तेमाल करके इंपोर्ट को फिर से बैलेंस कर सकता है