16 Dec 2025
'आप की याद आती रही रात भर...' क्या आपने पढ़ें हैं फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के ये शेर.
उम्मीद-वार
न जाने किस लिए उम्मीद-वार बैठा हूं, इक ऐसी राह पे जो तेरी रहगुज़र भी नहीं.
चाँदनी दिल
आप की याद आती रही रात भर, चाँदनी दिल दुखाती रही रात भर.
मसरूफ़-ए-इंतिज़ार
जानता है कि वो न आएंगे, फिर भी मसरूफ़-ए-इंतिज़ार है दिल.
बीमार दवा
बे-दम हुए बीमार दवा क्यूं नहीं देते, तुम अच्छे मसीहा हो शिफा क्यूं नहीं देते.
सर-ब-सर मंज़िल
'फ़ैज़' थी राह सर-ब-सर मंज़िल, हम जहाँ पहुँचे कामयाब आए.
बहार गुज़री
न गुल खिले हैं न उन से मिले न मय पी है, अजीब रंग में अब के बहार गुज़री है.