29 Jan 2026
'जिस में लाखों बरस की हूरें हों...' पढ़ें दाग़ देहलवी के लाजवाब शेर.
मेहरबाँ आते आते
न जाना कि दुनिया से जाता है कोई, बहुत देर की मेहरबाँ आते आते.
लाखों बरस
जिस में लाखों बरस की हूरें हों, ऐसी जन्नत को क्या करे कोई.
ये मिज़ाज है
कल तक तो आश्ना थे मगर आज ग़ैर हो, दो दिन में ये मिज़ाज है आगे की ख़ैर हो.
इंतिज़ार कौन करे
आप का ए'तिबार कौन करे, रोज़ का इंतिज़ार कौन करे.
मिरी रूठ
ले चला जान मिरी रूठ के जाना तेरा, ऐसे आने से तो बेहतर था न आना तेरा.
हमारे सामने
बात तक करनी न आती थी तुम्हें, ये हमारे सामने की बात है.
कम-बख़्त
लुत्फ़-ए-मय तुझ से क्या कहूँ ज़ाहिद, हाए कम-बख़्त तू ने पी ही नहीं.
हज़रत-ए-दाग़
हज़रत-ए-दाग़ जहाँ बैठ गए बैठ गए, और होंगे तिरी महफ़िल से उभरने वाले.
माँगा करो
हज़ार बार जो माँगा करो तो क्या हासिल, दुआ वही है जो दिल से कभी निकलती है.