14 Feb 2026
'मैं सुख़न में हूं उस जगह कि जहां...' पढ़ें तहज़ीब हाफ़ी के लाजवाब शेर.
नाख़ुदा साहिल
तमाम नाख़ुदा साहिल से दूर हो जाएं, समुंदरों से अकेले में बात करनी है.
हसरत से देखा
पेड़ मुझे हसरत से देखा करते थे, मैं जंगल में पानी लाया करता था.
छोड़ के घर
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर, ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है.
बसर रात
मैं जिस के साथ कई दिन गुज़ार आया हूं, वो मेरे साथ बसर रात क्यूँ नहीं करता.
सुख़न में हूं
मैं सुख़न में हूं उस जगह कि जहां, सांस लेना भी शाइरी है मुझे.
बाग में आया
सहरा से हो के बाग में आया हूं सैर को, हाथों में फूल हैं मिरे पाँव में रेत है.
रौशनी में ठंडक
इस लिए रौशनी में ठंडक है, कुछ चराग़ों को नम किया गया है.
नींद ऐसी
नींद ऐसी कि रात कम पड़ जाए, ख़्वाब ऐसा कि मुँह खुला रह जाए.
मेरी नक़लें
मेरी नक़लें उतारने लगा है, आईने का बताओ क्या किया जाए.