Yemen News : यमन में सऊदी और UAE आमने-सामने आ गए. वहीं, परिस्थिति बिगड़ने पर सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल के नेता देश छोड़कर UAE भाग गए, जिस पर सऊदी अरब का कहना है कि संयुक्त अरब अमीरात ने इनकी मदद की है.
Yemen News : सऊदी अरब ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर गंभीर आरोप लगाए हैं. सऊदी अरब का कहना है कि UAE ने देशद्रोह के मामले में यमन के अलगाववादी नेता को गुप्त तरीके से देश के बाहर भिजवाने का किया. इस आरोप के अरब प्रायद्वीप के दो अहम देशों के बीच तनाव बढ़ गया और ऐसे समय में जब यमन को लेकर दोनों देशों की दावेदारी काफी कमजोर पड़ गई. वहीं, सऊदी अरब ने इससे पहले आरोप लगाया था कि सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) के प्रमुख ऐदारूस अल-जुबैदी पहले नौका के माध्यम से सोमालिया भागे और उसके बाद वहां से UAE अधिकारियों की मदद से अबू धाबी में पहुंच गए. भारी विरोध के बीच ग्रुप के सेक्रेटरी-जनरल ने शुक्रवार को कहा कि सदर्न ट्रांज़िशनल काउंसिल (STC) और उसके संस्थानों को आज से खत्म कर दिया जाएगा.
अशांति के बाद लिया गया फैसला
बताया जा रहा है कि यह फैसला दक्षिणी इलाकों में हफ्तों की अशांति के बाद और इसके नेता संयुक्त अरब अमीरात भाग जाने के सिर्फ एक दिन बाद लिया गया है. अब्दुलरहमान जलाल अल-सेबैही ने शुक्रवार को यमन टीवी पर अपने संबोधन में कहा कि हद्रामौत और अल-महारा के गवर्नरेट में हाल ही में दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं का आकलन करने के लिए एक बैठक बुलाई गई थी और स्थिति को शांत करने के सभी प्रयासों को खारिज करने के बाद यह फैसला लिया गया. हालांकि, अंदरूनी फूट के साफ संकेत देते हुए सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) के प्रवक्ता अनवर अल-तमीमी ने X पर पोस्ट की और उसमें लिखा कि STC से जुड़े फैसले केवल काउंसिल और उसके अध्यक्ष की तरफ से लिए जा सकते हैं. उन्होंने आगे कहा कि काउंसिल सभी राजनीतिक पहलों के साथ सकारात्मक और रचनात्मक जुड़ाव जारी रखेगी.
पूरे इलाके में कब्जे के बाद तनाव बढ़ा
STC के हद्रामौत और अल-महारा गवर्नरेट में जाने और तेल से भरे इलाके में कब्जा करने के बाद तनाव बढ़ गया था. साथ ही इससे पहले नेशनल शील्ड फोर्सेज से जुड़ी सेनाएं पीछे हट गईं, जो ईरान समर्थित हाउती विद्रोहियों से लड़ने में सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ हैं. इसी बीच अल-सेबैही ने कहा कहा कि हमने हद्रामौत और अल-महारा गवर्नरेट के खिलाफ मिलिट्री ऑपरेशन के दौरान हिस्सा नहीं लिया, जिससे दक्षिणी गुटों की एकता को नुकसान पहुंचा और सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ संबंधों को नुकसान हुआ. साथ ही काउंसिल का लगातार बने रहना अब उस मकसद को पूरा नहीं करता जिसके लिए इसे बनाया गया था.
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