Home Top News पीएम के जवाब के बिना लोकसभा में पास हुआ धन्यवाद प्रस्ताव, सांसदों के हंगामे ने तोड़ी परंपरा

पीएम के जवाब के बिना लोकसभा में पास हुआ धन्यवाद प्रस्ताव, सांसदों के हंगामे ने तोड़ी परंपरा

by Neha Singh
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Motion of Thanks Passed

Motion of Thanks Passed: गुरुवार को लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पारंपरिक भाषण के बिना ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया.

5 February, 2026

22 साल बाद भारतीय सदन की परंपरा टूटी है. गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के जोरदार विरोध के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पारंपरिक भाषण के बिना ही राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया. जब लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष द्वारा लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव में संशोधनों पर वोटिंग करवाई, तो प्रधानमंत्री सदन में मौजूद नहीं थे और ये संशोधन खारिज कर दिए गए. इसके बाद स्पीकर ने 28 जनवरी को संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पढ़ा, जिसे विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी के बीच ध्वनि मत से पारित कर दिया गया. हालांकि पीएम मोदी राज्यसभा में इस पर जवाब देंगे.

लोकसभा में विपक्ष का हंगामा

विरोध जारी रहने पर, स्पीकर ने कार्यवाही दोपहर 2:00 बजे तक के लिए स्थगित कर दी. कांग्रेस सदस्य पीएम मोदी की तस्वीर वाले पोस्टर और ऊपर ‘नरेंद्र-सरेंडर’ का नारा लिखे हुए पोस्टर लेकर वेल में आ गए. समाजवादी पार्टी के सदस्य भी वेल में थे, जो वाराणसी में गंगा नदी पर मणिकर्णिका घाट पर तोड़फोड़ का मुद्दा उठाते हुए तीन बैनर और पैम्फलेट लिए हुए थे. एसपी के बैनरों पर रानी अहिल्याबाई होल्कर की तस्वीरें थीं, जिन्होंने लगभग 300 साल पहले घाटों का विकास किया था. तृणमूल कांग्रेस के सदस्य भी विरोध में शामिल होने के लिए वेल में थे, जबकि INDIA ब्लॉक के अन्य सदस्य, जिनमें DMK और वामपंथी दल शामिल थे, एकजुटता दिखाते हुए अपनी सीटों पर और गलियारे में खड़े थे.

2004 के बाद पहली बार हुआ ऐसा

संवैधानिक विशेषज्ञ पी डी टी आचार्य ने प्रधानमंत्री के पारंपरिक जवाब के बिना राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित होने को एक “अभूतपूर्व घटनाक्रम” बताया. लोकसभा के पूर्व महासचिव आचार्य ने कहा कि 2004 में, तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सदन में मौजूद थे, लेकिन तत्कालीन विपक्षी भाजपा के साथ हुए समझौते के अनुसार उन्होंने भाषण नहीं दिया था.

मनमोहन सिंह ने 10 जून, 2004 को कहा था, “स्पीकर महोदय, मुझे पता चला है कि दोनों तरफ की राजनीतिक पार्टियों के बीच यह सहमति बनी है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को सीधे वोटिंग के लिए रखा जाए और सर्वसम्मति से पारित किया जाए. इसलिए महोदय, मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि प्रस्ताव को वोटिंग के लिए रखा जाए.”

News Source: PTI

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