Fake Medicine Factory Busted: एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स ने बिहार के गया में नकली दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है, जो दिल्ली तक दवाइयां सपलाई कर रही थी.
- दिल्ली से प्रशांत त्रिपाठी की रिपोर्ट
15 February, 2026
एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने नकली दवाएं/वायल बनाने वाली एक और नकली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है. DCP/ANTF, संजीव कुमार यादव के ओवरऑल सुपरविज़न में, इंस्पेक्टर नितेश कुमार की टीम ने ACP सतेंद्र मोहन की देखरेख में यह बड़ी कामयाबी मिली है. इस ऑपरेशन में 9वें आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया, जिसमें मास्टर कोऑर्डिनेटर भी शामिल है. नकली दवाइयों का काला खेल बिहार के गया से चलाया जा रहा था. वहां से दवाइयां बनाकर दिल्ली समेत अलग-अलग राज्यों में सप्लाई का जा रही थी.
गया में चल रही थी फैक्ट्री
इस केस में पिछली गिरफ्तारियों से मिली टेक्निकल और ह्यूमन इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने के बाद, यह पता चला कि तनिष्क, जिसे पिछले हफ़्ते कई गिरफ्तारियों में गिरफ्तार किया गया था, उसने गया के अरुण नाम के एक व्यक्ति के साथ मिलकर काम किया था. अरुण बिहार के गया में एक नकली फैक्ट्री चलाता हुआ पाया गया, जिसके पास दवाइयां बनाने का लाइसेंस नहीं था. गया से ड्रग डिपार्टमेंट की टीम को बुलाया गया और फैक्ट्री बिना किसी वैलिड लाइसेंस के, जरूरी मैन्युफैक्चरिंग और एनालिटिकल केमिस्ट की गैर-मौजूदगी में चलाई जा रही थी. बड़ी मात्रा में इक्विपमेंट, नकली टैबलेट/वायल, पैकिंग मटीरियल इस तरह मिला- ज़िंक की 119800 नकली टैबलेट, एज़िथ्रोमाइसिन की 42,480 नकली टैबलेट, 27 Kgs पैरासिटामोल.
🚨💊 MAJOR BREAKTHROUGH | ANTF, Crime Branch, Delhi 💊🚨
— Crime Branch Delhi Police (@CrimeBranchDP) February 14, 2026
🔴 Second Fake Medicine Factory Busted
👮♂️ Master coordinator arrested | 9 cartel members held so far
💥 Massive seizure:
💊 1.6+ lakh spurious tablets
💉 Fake ampules & opioids
⚙️ Heavy machinery used for illegal drug… pic.twitter.com/G2bFQrXtIN
ऐसे चल रहा था काला खेल
यह नेटवर्क अलग-अलग तरह के ओपिओइड/नकली दवाइयां/शीशियां/सिरप बनाने और इन प्रोडक्ट्स को नकली मेडिकल कंपनियों और रीजनल सप्लायर/स्मगलर/पैडलर के ज़रिए बेचकर मोटा पैसा कमाने में शामिल है. कच्चा माल खरीदने, प्रोसेसिंग करने, बेचने का पूरा प्रोसेस गैर-कानूनी तरीके से किया जाता है, जिससे बड़े पैमाने पर आम लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ होता है. अरुण ने गैर-कानूनी तरीके से तस्करी किए गए ट्रामाडोल पाउडर (5 Kgs से ज़्यादा, जिसकी इंटरनेशनल मार्केट में कीमत 5 करोड़ से ज़्यादा है) को प्रोसेस किया और अपनी फैक्ट्री में टैबलेट बनाईं. टैबलेट को फिर से नकली मेडिकल कंपनियों के ज़रिए ज़्यादा दामों पर बेचने के लिए भेज दिया गया. ऐसी टैबलेट का इस्तेमाल हेरोइन की जगह किया जा रहा है.
59 साल का अरुण मूल रूप से गया, बिहार का रहने वाला है, उसने कम समय में बहुत पैसा कमाने के लिए बड़े पैमाने पर दवाएं/वायल/ओपिओइड बनाने के लिए एक बहुत बड़ी फैक्ट्री शुरू की है. वह दूसरे कार्टेल मेंबर्स के साथ मिलकर रॉ मटेरियल लाता था और अपनी फैक्ट्री में बड़े पैमाने पर ओपिओइड बनाता था और उसे ओपिओइड/दवाओं के गैर-कानूनी मार्केट के ज़रिए दूसरे राज्यों में बेचने के लिए भेजता था.
अलग अलग राज्यों में छापेमारी
यह ऑपरेशन भरोसेमंद इंटेलिजेंस, अलग-अलग राज्यों में लगातार और मिलकर की गई छापेमारी, टेक्निकल जांच और तेज़ पुलिस कार्रवाई पर आधारित था. इससे न सिर्फ़ आम लोगों की जान से खेल रही 2 नकली फैक्ट्रियां खत्म हुईं, बल्कि बड़े पैमाने पर कच्चा माल और साइकोट्रोपिक नेचर की प्रोसेस्ड नकली दवाएं/वायल/ओपिओइड ले जाने में शामिल 9 कार्टेल मेंबर भी गिरफ्तार हुए. यह कार्रवाई एक बड़े नेटवर्क को बड़ा झटका देती है, जो CP/दिल्ली के विज़न यानी ड्रग फ्री दिल्ली की दिशा में एक और कदम है.
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