US-Iran War Update: यूएस और ईरान की लड़ाई अब उस मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां से वापसी का रास्ता साफ नज़र नहीं आ रहा है. डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के तेल नेटवर्क पर बड़ा हमला कर दिया है.
14 March, 2026
मिडिल ईस्ट में तनाव अब एक ऐसे मोड़ पर आ गया है जहां से वापसी का रास्ता धुंधला पड़ता जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ऐलान किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के तेल नेटवर्क के लिए बहुत खास खा़र्ग आइलैंड (Kharg Island) के सैन्य ठिकानों पर जोरदार बमबारी की है. ये आइलैंड ईरान के तेल एक्सपोर्ट का मेन सेंटर माना जाता है. ट्रंप की इस कार्रवाई ने सीधे ईरान की इकोनॉमी की नस पर हाथ रख दिया है.
ट्रंप की वॉर्निंग
ट्रम्प ने साफ-साफ कहा है कि अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को खा़र्ग द्वीप के सैन्य ठिकानों को पूरी तरह से बर्बाद यानी नेस्तनाबूद कर दिया है. हालांकि, उन्होंने अभी ईरान के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को नहीं छुआ है, लेकिन ट्रंप ने यहां एक बड़ी वॉर्निंग जरूर दे दी है. डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि अगर ईरान या किसी और ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ से गुजरने वाले जहाजों के रास्ते में अड़ंगा डालने की कोशिश की, तो वो तेल के बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह खत्म करने के अपने फैसले पर दोबारा सोचेंगे. यानी इशारा साफ है कि ईरान की इकोनॉमी अब अमेरिका के निशाने पर है. वैसे, एक दिन पहले ईरान की संसद के चेयरमैन ने वॉर्निंग दी थी कि अगर उनके समुद्री सीमा वाले द्वीपों पर हमला हुआ, तो ईरान अपनी सारी मर्यादाएं छोड़ देगा और बड़े लेवल पर जवाबी कार्रवाई करेगा. अब देखना ये है कि ईरान इस ताजा हमले का क्या जवाब देता है.
तेहरान में धमाका
ईरान की राजधानी तेहरान में भी शुक्रवार का दिन काफी तनावपूर्ण रहा. यहां के फिरदौसी स्क्वायर पर सालाना ‘कुद्स डे’ रैली के लिए हजारों लोग इकट्ठा हुए थे, जहां इजरायल और अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी हो रही थी. तभी दोपहर के वक्त एक जोरदार धमाके से पूरा इलाका दहल उठा. दिलचस्प बात ये है कि इजरायल ने धमाके से कुछ देर पहले ही एक फारसी भाषा के सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए लोगों को वो इलाका खाली करने की चेतावनी दी थी. हालांकि, ईरान में इंटरनेट बंद होने की वजह से बहुत कम लोग इसे देख पाए. धमाके के वक्त ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई वहां मौजूद थे और टीवी पर इंटरव्यू दे रहे थे. धमाके के बाद उनके बॉडीगार्ड्स ने उन्हें घेर लिया, लेकिन उन्होंने हार न मानने की बात दोहराई.
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बढ़ती अमेरिकी फौज
वॉर के बढ़ते दायरे को देखते हुए अमेरिका ने अपनी ताकत और बढ़ा दी है. एक अमेरिकी ऑफिसर के मुताबिक, करीब 2500 और मरीन सैनिकों और एक युद्धपोत ‘यूएसएस त्रिपोली’ को मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा है. ये मरीन सैनिक दूतावासों की सिक्योरिटी, नागरिकों को निकालने और आपदा राहत जैसे कामों में माहिर हैं. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि कोई जमीनी हमला होने वाला है, लेकिन ये तैनाती बताती है कि अमेरिका किसी भी सिचुएशन के लिए पूरी तरह से तैयार है. फिलहाल इस इलाके में अमेरिका के 12 युद्धपोत और एक विमान वाहक पोत ‘यूएस अब्राहम लिंकन’ पहले से ही तैनात हैं. अकेले कतर के अल-उदैद एयर बेस पर लगभग 8000 अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं.
वॉर की भारी कीमत
अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने बताया कि वॉर शुरू होने के बाद से अब तक ईरान में 15,000 से ज्यादा दुश्मन ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं. यानी रोजाना औसतन 1,000 हमले. उधर इजरायल ने भी पिछले 24 घंटों में 200 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है, जिनमें मिसाइल लॉन्चर और हथियार बनाने वाली साइट्स शामिल हैं. इस बीच एक बुरी खबर भी सामने आई. इराक में अमेरिका का एक ईंधन भरने वाला विमान KC-135 क्रैश हो गया, जिसमें सवार सभी 6 ड्राइवर ग्रुप के मैंबर्स की मौत हो गई. हालांकि, सेना का कहना है कि ये क्रैश किसी हमले की वजह से नहीं हुआ था.
ईरान के ड्रोन हमले
इस वॉर की सबसे ज्यादा मार आम जनता पर पड़ रही है. लेबनान में इजरायली हमलों में अब तक लगभग 800 लोग मारे जा चुके हैं और साढ़े आठ लाख लोग बेघर हो गए हैं. इजरायल ने साफ कर दिया है कि हिजबुल्लाह के खिलाफ उसकी कार्रवाई नहीं रुकेगी. वहीं दूसरी तरफ, ईरान भी चुप नहीं है. वो ओमान और तुर्की जैसे पड़ोसी देशों के करीब से गुजरने वाले जहाजों और ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले कर रहा है. देखा जाए तो, मिडिल ईस्ट की ये वॉर अब एक ऐसी जंग में बदल चुकी है जिसने पूरी दुनिया की इकोनॉमी और शांति को खतरे में डाल दिया है. ट्रंप का कहना है कि ये वॉर तब खत्म होगी जब वो इसे खत्म करना चाहेंगे.
News Source: PTI
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