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लेह से अंडमान तक संघ की दस्तक: तेजी से फैला RSS का नेटवर्क, अब ‘राज्य प्रचारक’ संभालेंगे जिम्मेदारी

by KamleshKumar Singh
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लेह से अंडमान तक संघ की दस्तक: तेजी से फैला RSS का नेटवर्क, नई व्यवस्था में 'प्रांत' की जगह अब 'राज्य प्रचारक' संभालेंगे जिम्मेदारी

RSS Meeting: बैठक के बाद संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और अंतरराष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने संगठन की दिशा, अंतरराष्ट्रीय हालात और समसामयिक विवादों पर संघ का पक्ष रखा.

RSS Meeting: हरियाणा के समालखा में हुई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में संगठन विस्तार से लेकर सामाजिक कार्यक्रमों और बड़े संगठनात्मक बदलावों तक कई अहम मुद्दों पर मंथन हुआ. बैठक के बाद संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और अंतरराष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने प्रेस वार्ता कर संगठन की दिशा, अंतरराष्ट्रीय हालात और समसामयिक विवादों पर संघ का पक्ष रखा. तीन दिनों तक चली प्रतिनिधि सभा की इस बैठक में देशभर के 46 प्रांतों से 1487 प्रतिनिधि शामिल हुए. चार साल बाद समालखा में हुई इस बैठक में संघ के विस्तार और आने वाले वर्षों की रणनीति पर चर्चा हुई. संघ के मुताबिक देशभर में 55 हजार से ज्यादा स्थानों पर 88 हजार से अधिक शाखाएं चल रही हैं, जिनमें नगरीय क्षेत्रों में ही 10 से 12 हजार शाखाएं सक्रिय हैं. संघ का दावा है कि संगठन अब अंडमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह और जनजातीय इलाकों तक तेजी से फैल रहा है.

विश्व शांति संघ का मूल ध्येय

बैठक में “पंच परिवर्तन”, भारतीय संस्कृति के नैरेटिव को मजबूत करने और समाज में सज्जन शक्तियों के सहयोग जैसे मुद्दों पर भी मंथन हुआ. मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष पर संघ ने शांति की वकालत करते हुए कहा कि विश्व शांति उसका मूल ध्येय है. वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत पर दिए गए श्रद्धांजलि संदेशों को लेकर उठे विवाद पर भी संघ ने भारत की परंपरा का हवाला दिया. प्रतिनिधि सभा में संघ के सामाजिक और वैचारिक कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई. गुरु तेग बहादुर से जुड़े विषयों पर देश के 31 प्रांतों में 2134 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें बड़ी संख्या में सिख अनुयायी भी शामिल हुए. आने वाले समय में संघ शिक्षा वर्गों का भी बड़ा कार्यक्रम तय किया गया है. देशभर में कुल 63 संघ शिक्षा वर्ग आयोजित होंगे, जिनमें 11 प्रमुख वर्ग और करीब 45 प्रशिक्षण वर्ग शामिल हैं. संघ के मुताबिक उसके स्वयंसेवक समाज के हर क्षेत्र में सक्रिय हैं और करीब 45 हजार स्थानों पर एकल विद्यालय चलाए जा रहे हैं.

क्षेत्रों की संख्या 11 से घटकर होंगे 9

वहीं यूजीसी विवाद को लेकर होसबोले ने साफ कहा कि मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है और अदालत के फैसले के बाद ही संघ अपना रुख स्पष्ट करेगा. बैठक की सबसे अहम चर्चा संघ के संगठनात्मक ढांचे में प्रस्तावित बड़े बदलाव को लेकर रही. संघ अब ऐसा ढांचा तैयार करने की दिशा में बढ़ रहा है जिसमें संगठन की ताकत ऊपर से नीचे नहीं बल्कि नीचे से ऊपर तक मजबूत हो. अब तक बड़े राज्यों को कई प्रांतों में बांटकर वहां प्रांत प्रचारक नियुक्त किए जाते थे और देशभर में करीब 45 प्रांत प्रचारक सक्रिय हैं. लेकिन नई व्यवस्था के तहत प्रांत प्रचारकों की जगह राज्य प्रचारक नियुक्त करने की योजना है यानी एक राज्य में अब एक ही राज्य प्रचारक पूरे संगठन की जिम्मेदारी संभालेगा. इसके साथ ही शीर्ष स्तर पर क्षेत्रों की संख्या 11 से घटाकर 9 करने की तैयारी है, जबकि नीचे के स्तर पर संभाग को संगठन की नई इकाई के रूप में मजबूत किया जाएगा.

देशभर में बनेंगे 80 संभाग

नई व्यवस्था में दो प्रशासनिक मंडलों को मिलाकर एक संभाग बनाया जाएगा और वहां संभाग प्रचारक तैनात होंगे. देशभर में ऐसे करीब 80 संभाग बनने की संभावना है. इस बदलाव से जिला और प्रखंड स्तर के कार्यकर्ताओं का संवाद सीधे संभाग प्रचारकों से होगा और फैसलों की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है. संघ सूत्रों के मुताबिक संगठनात्मक बदलाव के इस प्रस्ताव को अभी सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है. सितंबर 2026 की बैठक में इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है और जनवरी-फरवरी 2027 तक पूरे देश में लागू करने का लक्ष्य है यानी अपने सौ वर्ष पूरे होने से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संगठन को नए ढांचे, ज्यादा विकेंद्रीकरण और जमीनी स्तर पर मजबूत संवाद के साथ आगे बढ़ाने की तैयारी में है ताकि विचार और संगठन दोनों स्तरों पर उसकी पकड़ और मजबूत हो सके. साफ है कि सौ साल के पड़ाव से पहले संघ संगठन को नए ढांचे में ढालने की तैयारी कर रहा है, जहां लक्ष्य साफ है, जमीनी पकड़ और वैचारिक प्रभाव दोनों को और व्यापक बनाना.

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