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रिश्तों के सहारे मिशन शुरू, UP के बंगाली परिवारों के जरिए बंगाल में BJP की कमल खिलाने की रणनीति

by DheerajTripathi
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West Bengal Election BJP vs TMC

West Bengal : आगामी पश्चिम चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने अपनी कमर कस ली है. इसी बीच बीजेपी ने भी अनोखे तरीके से वोटर्स को अपनी ओर आकर्षित करना शुरू कर दिया है.

West Bengal : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के ऐलान के साथ ही सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस बार चुनाव प्रचार में एक नई रणनीति के साथ उतरने की तैयारी में है. ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ अभियान के तहत उत्तर प्रदेश में रहने वाले बंगाली परिवारों के जरिए पश्चिम बंगाल के मतदाताओं तक योगी सरकार के विकास मॉडल और कानून व्यवस्था की तस्वीर पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है. BJP का मानना है कि उत्तर प्रदेश में रहने वाले बंगाली समाज के लोग अपने रिश्तेदारों और परिचितों से संवाद कर वहां के मतदाताओं तक विकास और सुशासन का संदेश पहुंचाएंगे.

प्रचार का तैयार किया अलग मॉडल

इसी रणनीति को जमीनी स्तर पर लागू करने में भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और पश्चिम बंगाल प्रभारी सुनील बंसल भी लगातार चुनावी मैनेजमेंट में जुटे हुए हैं. पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले BJP ने प्रचार का एक अलग मॉडल तैयार किया है. पार्टी ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ अभियान के तहत उत्तर प्रदेश में बसे बंगाली समाज को चुनावी संवाद का माध्यम बना रही है. रणनीति यह है कि यूपी के बंगाली परिवार पश्चिम बंगाल में रहने वाले अपने रिश्तेदारों और परिचितों को फोन, सोशल मीडिया और निजी संपर्क के जरिए बताएंगे कि उत्तर प्रदेश में विकास और कानून व्यवस्था के क्षेत्र में किस तरह बदलाव आया है.

BJP का दावा है कि उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में बुनियादी ढांचे, निवेश और उद्योग के क्षेत्र में बड़े बदलाव हुए हैं. पार्टी चाहती है कि यूपी में रहने वाला बंगाली समाज अपने अनुभव साझा कर बंगाल के मतदाताओं तक यह संदेश पहुंचाए कि विकास और सुशासन का मॉडल क्या होता है?

डिजिटल माध्यम से भेजेंगे मैसेज

वहीं, बंगाली समाज के अध्यक्ष मानस मित्रा कहते हैं कि उत्तर प्रदेश का जो विकास हुआ है वह योगी आदित्यनाथ का मॉडल है और मोदी जी के सहयोग से हुआ है. अगर यही विकास पश्चिम बंगाल में होता तो बंगाल आर्थिक रूप से इतना पीछे नहीं होता. हम चाहते हैं कि बंगाल भी उसी तरह तरक्की करे जैसे उत्तर प्रदेश और अन्य राज्य कर रहे हैं. हम डिजिटल माध्यम से अपने लोगों से जुड़ेंगे और बताएंगे कि यूपी में किस तरह विकास हुआ है और भाजपा की सरकार कैसे बने इसके लिए प्रयास करेंगे. भाजपा की इस रणनीति में सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों को भी जोड़ा जा रहा है। यूपी में बंगाली समाज की बैठकों और संवाद कार्यक्रमों के जरिए लोगों को इस अभियान से जोड़ने की कोशिश की जा रही है.

दरअसल भाजपा मानती है कि व्यक्तिगत संपर्क का यह तरीका चुनाव में असर डाल सकता है. इसी रणनीति को जमीन पर उतारने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और पश्चिम बंगाल प्रभारी सुनील बंसल लगातार संगठन और चुनावी प्रबंधन पर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश में बूथ स्तर तक मजबूत संगठन खड़ा करने और BJP का वनवास समाप्त कराकर सरकार बनवाने का अनुभव रखने वाले सुनील बंसल अब पश्चिम बंगाल में भी संगठन तंत्र को मजबूत करने और चुनावी रणनीति को धार देने में जुटे हुए हैं.

प्रदेश को किया अपराध से मुक्त

भाजपा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजीव मिश्रा ने कहा कि 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश को अपराधों का प्रदेश कहा जाता था, लेकिन आज उत्तर प्रदेश उद्योग और विकास का मॉडल बन चुका है. हमने बंगाली समाज को एकजुट किया है. कोलकाता में जिस तरह अपराध बढ़ रहे हैं और हिंदुओं पर हमले हो रहे हैं, वहां बदलाव की जरूरत है. उत्तर प्रदेश का बंगाली समाज हमारे साथ है और बड़ी संख्या में लोग कोलकाता जाकर चुनाव की रणनीति बनाएंगे. पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी को हटाकर वहां कमल खिलाना है.

ममता सरकार को देंगे चुनौती

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा इस बार चुनाव प्रचार के साथ-साथ सामाजिक और व्यक्तिगत नेटवर्क का इस्तेमाल कर बंगाल के मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है. हालांकि तृणमूल कांग्रेस भाजपा की इस रणनीति को चुनावी प्रचार करार देती रही है. पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले भाजपा अब प्रचार के नए तरीके आजमा रही है। उत्तर प्रदेश में रहने वाले बंगाली परिवारों के जरिए बंगाल के मतदाताओं तक योगी सरकार के विकास मॉडल और कानून व्यवस्था की तस्वीर पहुंचाकर भाजपा ममता बनर्जी सरकार को चुनौती देने की रणनीति बना रही है. साथ ही संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री और पश्चिम बंगाल प्रभारी सुनील बंसल भी लगातार चुनावी मैनेजमेंट में जुटे हुए हैं.

अब देखना होगा कि रिश्तों और सामाजिक संपर्क के सहारे चलाया जा रहा यह अभियान चुनावी राजनीति में कितना असर डालता है। यानी पश्चिम बंगाल चुनाव में इस बार सियासी मुकाबला सिर्फ रैलियों और भाषणों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रिश्तों और सामाजिक संपर्क के जरिए भी मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है. अब नजर इस बात पर रहेगी कि भाजपा की यह रणनीति चुनावी मैदान में कितना असर दिखाती है.

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