Home Latest News & Updates Ujjain में बोरवेल का काल, खेल-खेल में 200 फीट गहरे गड्ढे में समाया मासूम, जिंदगी बचाने की जंग जारी

Ujjain में बोरवेल का काल, खेल-खेल में 200 फीट गहरे गड्ढे में समाया मासूम, जिंदगी बचाने की जंग जारी

by Preeti Pal
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Ujjain में बोरवेल का काल, खेल-खेल में 200 फीट गहरे गड्ढे में समाया मासूम, जिंदगी बचाने की जंग जारी

Ujjain Boy Rescue Operation: मध्य प्रदेश के उज्जैन से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां एक 2 साल का मासूम बच्चा खेलते-खेलते खुले पड़े बोरवेल के गड्ढे में गिर गया.

10 April, 2026

मध्य प्रदेश के उज्जैन से एक ऐसी खबर आई है जिसने सबकी धड़कनें बढ़ा दी हैं. दरअसल, खेल-खेल में एक मासूम बच्चा खुले पड़े बोरवेल के गड्ढे में गिर गया. ये वाकया गुरुवार रात करीब 8 बजे का है, जब उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील के झालरिया गांव में अफरा-तफरी मच गई. ढाई साल का भागीरथ अपने परिवार के साथ खेत में था, जब वो अचानक 70 फीट गहरे बोरवेल में जा गिरा. ये कहानी जितनी दुखद है, उतनी ही हैरान करने वाली भी. दरअसल, भागीरथ का परिवार राजस्थान के पाली जिले से आया हुआ एक चरवाहा परिवार है. वो कुछ दिन पहले ही अपनी भेड़ों को चराने के लिए मालवा क्षेत्र में आए थे. उन्हें क्या पता था कि जिस जमीन पर वे डेरा डाल रहे हैं, वहीं मौत का एक खुला गड्ढा उनके बच्चे का इंतजार कर रहा है.पुलिस के मुताबिक, उस बोरवेल के ऊपर एक पत्थर रखा हुआ था. खेलते टाइम एक भेड़ ने उस पत्थर को धक्का मारकर हटा दिया. एक्साइटमेंट में छोटे से भागीरथ ने ढक्कन खोला और अंदर झांकने लगा, तभी उसका बैलेंस बिगड़ा और वो सीधे अंदर जा गिरा.

रेस्क्यू ऑपरेशन

जैसे ही घटना की जानकारी मिली, प्रशासन हरकत में आ गया. उज्जैन के कलेक्टर रोशन सिंह और एसपी प्रदीप शर्मा खुद मौके पर मोर्चा संभाले हुए हैं. राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें आधुनिक उपकरणों के साथ पहुंच चुकी हैं. बच्चे को सेफ बाहर निकालने के लिए करीब आधा दर्जन पोकलेन और जेसीबी मशीनें बुलाई गई हैं. रेस्क्यू टीम बोरवेल के पास एक बड़ा गड्ढा खोद रही है ताकि किनारे से सुरंग बनाकर बच्चे तक पहुंचा जा सके.

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ऑक्सीजन का सहारा

अंधेरे और पतले गड्ढे में फंसे मासूम के लिए सबसे बड़ा चैलेंज सांस लेने का है. अधिकारियों ने तुरंत पाइप के जरिए बोरवेल में ऑक्सीजन की सप्लाई शुरू कर दी है. साथ ही, एक विशेष कैमरा नीचे उतारा गया है ताकि बच्चे की हर हरकत पर नजर रखी जा सके और उसे बचाने में आसानी हो. पूरा गांव और रेस्क्यू टीम इस कोशिश में जुटी है कि जल्द से जल्द भागीरथ से संपर्क हो सके और उसे सेफ बाहर निकाला जाए.

लापरवाही की कीमत

भागीरथ अपने पिता प्रवीण देवासी का सबसे छोटा बेटा है. उसके दो बड़े भाई फिलहाल राजस्थान में पढ़ाई कर रहे हैं. इस हादसे ने एक बार फिर खुले बोरवेल की प्रोब्लम को लाइमलाइट में ला दिया है. प्रशासन बार-बार हिदायत देता है कि बोरवेल को खुला न छोड़ें, लेकिन फिर भी ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं. फिलहाल, पूरा झालरिया गांव और उज्जैन प्रशासन इस उम्मीद में जुटा है कि भागीरथ को जल्द ही सेफ उसकी मां की गोद में पहुंचा दिया जाएगा. वैसे, ये पहली बार नहीं है जब मध्य प्रदेश में कोई मासूम बोरवेल में गिरा हो. प्रशासन की सख्त हिदायत के बावजूद कई खेतों में बोरवेल को खुला छोड़ दिया जाता है, जो बच्चों के लिए मौत का जाल बन जाते हैं.

News Source: PTI

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